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Govardhan puja - गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है - Festival

Hello dosto दीवाली की हार्दिक बधाई मैं इस पोस्ट में गोवर्धन पूजा [Govardhan puja] क्यों किया जाता है और इसका क्या महत्व है बताने वाला हूँ। आज का दिन आपके लिए हसी और ख़ुशियों भरा हो।

गोवर्धान पूजा फेस्टिवल - Sunday 15 November 2020 

भगवान कृष्णा के बारे मे

कृष्ण के बारे में जानना जरुरी है क्योकि गोवर्धन पूजा इससे जुड़ा हुआ है। कृष्ण यशोदा और नन्द का पुत्र था उसके असली माता पिता देवकी और वासुदेव थे कुछ कारन वश वासुदेव ने अपने पुत्र को उसके मित्र नन्द के पास अपने पुत्र को छोड़ दिया था। कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है उसने कई लीलाये किये है उसमे से यह एक है। इंद्र के घमंड को चूर करने के लिए भगवान ने ये लीला की थी। आगे पूरी जानकारी है -

आज मैं यह पोस्ट भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रभावित होकर मेरे मन में कुछ प्रभाव उतपन्न हुए हैं इन्हें मैं आपके साथ शेयर करता हूँ।

गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है [Govardhan puja]

भगवान श्री कृष्ण की लीला को आज तक कोई समझ नहीं पाया है और शायद ही कोई इसे समझ सकें क्योंकि भगवान ने यहां पृथ्वी पर आकर ऐसी ऐसी कृतियाँ की है की उन्हें समझ पाना बहुत ही कठिन है लेकिन इसे जानने का प्रयास चलिए करते हैं।

Story Of lord Krishna Govardhan Puja

भगवान के चरित्र को देखें तो वे अत्यंत ही करुण प्रकृति के थे, एक बार क्या होता है भगवान श्री कृष्ण को कोई एक आदमी होता है जो उसे गाली देता है लेकिन भगवान उसे सौ मौके देता है और कहते  है की जिस दिन तेरे पाप का घड़ा भर जाएगा उस दिन मैं तेरे को इस जीवन से मुक्त कर दुँगां दुर्भायवश मुझे उसका नाम याद नहीं आ रहा है। सौ बार गालियाँ देने के बाद भगवान ने उसके सर को सुदर्शन चक्र से काट दिया।

इससे हमें सिख मिलती है की कोई कितना भी गलती करे उसे हमें एक निश्चित समय तक सुधरने का मौक़ा अवश्य देना चाहिए अगर फिर भी ना सुधरे तो हमें आगे कदम उठाना चाहिए।


गोवर्धन पूजा के पीछे भगवान श्री कृष्ण का प्रकृति प्रेम मुझे साफ़ दिखाई देता है! आइये जाने कैसे यह घटना उस समय की है जब भगवान श्री कृष्ण गोकुल में निवास किया करते थे उस समय लोगों की मानसिकता भगवान के प्रति बहुत ही घनिष्ठ थी और लोग प्रॉपर उनकी बातो को माना करते थे। किसान उस समय भगवान इंद्र की पूजा किया करते थे जिन्हें वर्षा का देवता कहा जाता है। एक बार क्या होता है 

ग्वाले भगवान इंद्र की उपासना के लिए कहीं जा रहें होते हैं तब भगवान इंद्र देव के घमंड को तोड़ने के लिए उनकी पूजा करने से उन्हें जो चढ़ाते हैं उन्हें न चढ़ाने की बात करते हैं क्योकि उस समय इंद्र देव अपनी घमंड की अग्नी में जल रहे होते हैं और भगवान उनके इसी घमंड को तोड़ने के लिए यह लीला रचते हैं इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ग्वालों और गोपियों को समझाते हैं की आप हमारी माता समान प्रकृति जो हमें बहुत कुछ देती है जैसे नदी जो जल देते हैं और पहाड़ जिनसे औषधि प्राप्त होती है। उनकी पूजा छोड़ कर हम भला इंद्र की पूजा क्यों करें। ऐसा कहकर भगवान सभी ग्वालों और गोपियों को मना कर देते हैं। सभी उस समय प्रकृति की पूजा करने के लिए चले जाते हैं फिर क्या होता है ?

भगवान इंद्र क्रोध में इतना आग-बबूला हो जाता है की वह इतनी तेज बारिस करता है की वहां पूरा गाँव और पशु-पक्षी त्राहि त्राहि करने लगते हैं। फिर सभी श्री कृष्ण के शरण में आते हैं और श्री कृष्ण से कहते हैं हे कृष्ण हमारी रक्षा करें हमने आपको पहले भी कहा था की इंद्र क्रोधित हो जाएंगे लेकिन आपने नहीं माना फिर क्या होता है ? भगवान तो इंद्र के क्रोध रूपी घमंड को तोड़ना चाहते थे और उन्होंने इसको तोड़ने के लिए एक जगह का सहारा लिया, भगवान ने गोवर्धन पर्वत को अपने छोटी उंगली में धारण कर लिया और भगवान के साथी सभी गोप ग्वाले वहां पर्वत के निचे खड़े हो गए जिससे वर्षा का तनिक भी प्रभाव उन पर नहीं पड़ा फिर क्या होता है ?

इस प्रकार इंद्र का क्रोध और बढ़ता जाता है और वह निचे आकर भगवान से युद्ध करने को आतुर हो जाता है और फिर युद्ध के दौरान भगवान के असली रूप का पता उन्हें चलता है फिर जो होता है वह इस प्रकार है भगवान की असलियत को जानकर वे  भगवान से क्षमा याचना करते हैं। माफ़ी मांगते हैं और इस प्रकार उनका (इंद्र का) घमण्ड टूट जाता है।

गोवर्धन पर्वत के कारण और भगवान श्री कृष्ण के कारण लोगों की जान बच जाती है और साथ ही लोगों को प्रकृति के प्रति भगवान आकृष्ट करते हैं। भगवान के इस प्रकार उनके घमंड को तोड़ने के प्रति उनका प्रकृति के प्रति प्रेम साफ़ झलक रहा है इसलिए मैं भी आपसे कहता हूँ प्रकृति के प्रति सजग रहें क्या पता कल प्रकृति के प्रकोप से हम खुद को भी न बचा सकें। इस प्रकार उस समय से गोवर्धन पूजा चली आ रही है। और चलती रहेगी युगों युगों तक।

हमारे यहाँ गोवर्धन भगवान की पूजा बड़े धूम-धाम से की जाती है मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ गाँव में रहता हूँ तो यहां पर मैंने देखा है की यादव समाज द्वारा सबसे ज्यादा इस त्यौहार को प्राथमिकता दी जाती है जो की दीपावली के बाद मनाया जाता है। हमारे यहां पशुओं को खाना खिलाते हैं और उनकी पूजा करते हैं इस दिन।  आपके यहां कैसे और किस प्रकार गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है कमेंट करके अवश्य बताएं।

इस पोस्ट के पीछे क्या इंटेंसिव रहा है मेरा 

इस पोस्ट को लिखने के पीछे मेरे लिए एक कारण सिर्फ प्रकृति के प्रति लोगों को जागरूक करना है और पशु पक्षियों के प्रति लोगों का ध्यान आकृष्ट करना है। इस पोस्ट में बस इतना ही मिलते है कुछ नई जानकारियों के साथ। 

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