स्पैनर क्या है Spanner in hindi - Diesel Mechanic

Chapter 5.4

खोलने एवं बाँधने वाले औजार स्पैनर,  आकार, प्रकार 

आपका स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आज मै आपके लिए लेकर आया हूँ डीजल मैकेनिक में उसे होने वाले खोलने एवं बाँधने वाले औजार को लेकर आज हम बात करेंगे की कैसे हम स्पेनर का उपयोग करके किसी मशीन को खोल सकते एवं बाँध सकते हैं इससे पहले मैंने आपके लिए एक पोस्ट और लिखा था जिसमें मैंने आपको बताया था इसी खोलने एवं बाँधने के लिए उपयोग किया जाने वाला औजार Pechkas और प्लायर के बारे में आपको बताया था आज के इस पोस्ट में चलिए पढ़ते हैं स्पैनर के बारे में।


स्पैनर क्या है (What is Spanner)

किसी मशीन को खोलने एवं बाँधने के लिए सबसे अधिक प्रयोग हम हो या कोई और हो इसी स्पैनर का प्रयोग करता है. आम बोलचाल की भाषा में इसे ज्यादातर चाबी के नाम से जाना जाता है.


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स्पैनर किस पदार्थ के बने होते है -स्पैनर को ज्यादातर ड्राप फोर्ज स्टील या हाई कार्बन स्टील के बनाया जाता है। 

स्पैनर का आकार (Size of Spanner)

स्पैनर के आकार की बात करें तो इसका आकार इसकी उपयोगिता के आधार पर निर्भर करता है. कार्य किस प्रकार के करना है उस हिसाब से इसे अलग अलग बनाया जा सकता है. अब बात करते है इसके प्रकारों की तो यह निम्न प्रकार का होता है -

स्पैनर का प्रकार (Types of Spanner)

  1. ओपन एण्ड स्पैनर (Open End Spanner)
  2. डबल एण्ड स्पैनर (Double End Spanner)
  3. रिंग  स्पैनर (Ring Spanner)
  4. सॉकेट स्पैनर (Socket Spanner)
  5. एडजस्टेबल स्पैनर (Adjustable Spanner)
  6. हुक स्पैनर  (Huck Spanner)
  7. एलेन स्पैनर (LN Spanner)

1. ओपन एण्ड स्पैनर (Open End Spanner) - इस  प्रकार के स्पैनर में केवल एक और खुला हुआ भाग होता है जिससे नट को फसाया जाता है. और उसे खोला जाता है एवं कसा जाता है. इसे एक और नाम सिंगल एन्ड स्पैनर के नाम से भी जाना जाता है. इसकी माप या साइज को मापने की बात करें तो इसे बीच से नाप कर इसके साईज को नाप कर बताया जाता है।


2. डबल एण्ड स्पैनर (Double End Spanner) - इस प्रकार के स्पैनर भी ओपन एण्ड स्पैनर के समान होता है. फर्क सिर्फ इतना होता है की इसके दोनों और खुला हुआ भाग होता है जो की अलग अलग नाप का होता है और इसे उनके सिरों पर लिखा जाता है। इसके दोनों सिरों में जो ओपन हैड बनाया जाता है वह प्रायः 30 से 150 अंश के कोण पर बनाया जाता है. इस प्रकार के स्पैनर में इस प्रकार की सुविधा होने के कारण इसका प्रयोग सबसे ज्यादा किया जाता है।  लेकिन इसकी खराबी यह है की यह जल्दी ख़राब होता है और ठीक से नही फसा पाने पर नट के हेड को ख़राब कर देता है.

3. रिंग स्पैनर (Ring Spanner) - इस प्रकार के स्पैनर में दोनों ओर या एक ओर गोल गोल छल्ले बने होते हैं  या कहें रिंग के समान रचनाये होती है जिसमें नट को फंसाया जाता है. और खोला एवं कसा जाता है इसी लिए इसे खोलने एवं बाँधने वाले औजार कहा जाता है. ये छल्ले (रिंग ) बॉडी से विपरीत दिशा में थोड़े से झुके हुए होते हैं.


4. सॉकेट स्पैनर (Socket Spanner) इस प्रकार के स्पैनर गोल गुटको के रूप में आते है इसके एक सिरे में चौकोर खाचा बना होता है जो की एक ही साइज का होता है. और दूसरे और अलग अलग साईज के गोल ( रिंग ) गुटकों के रूप में आते हैं. यह गोल गुटके अलग अलग माप के बनाये या बने होते है जो की विभीन्न साइज के नट को खोलने एवं कसने के लिए उपयोग किया जाता है. इसमें भी रिंग स्पैनर के समान खाँचे कटे होते हैं।


5. एडजस्टेबल स्पैनर (Adjustable Spanner) - जैंसे की इसका नाम है एडजस्टेबल स्पैनर उसी प्रकार इसे एडजस्ट किया जा सकता है।  और इसक प्रकार के स्पैनर का प्रयोग वहां किया जाता है जहां पर किसी अन्य प्रकार के स्पैनर फीट नहीं होते हैं।  इस प्रकार के स्पैनर को स्क्रू रिंच के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इसे एक स्क्रू की भाँती कंट्रोल करने के लिए हेड में एक स्क्रू लगा होता है।


6. हुक स्पैनर (Huck Spanner) - इस प्रकार के स्पैनर के आकार के बात करें तो यह C  के आकार का होता है। इसका प्रयोग राउंड नट के लिए किया जाता है। इसके सिरे पर पिन  बना होता है।


7. एलेन की (LN key Spanner)- इस प्रकार स्पैनर का प्रयोग ऐसे नटों को खोलने एवं कसने में किया जाता है जिसके हेड पर छह कोर वाले खांचे बने होते हैं यह छः पहल वाला ठोस पसली रॉड होता है. यह एक ओर से 90 अंश के कोण पर झुका होता है।


सावधानियाँ 
  1. सही माप के स्पैनर का ही प्रयोग करना चाहिए नहीं तो नट या  बोल्ट का हेड ख़राब जो सकता है। 
  2. स्पैनर के दूसरे सिरे का प्रयोग पाइप के साथ नट खोलने या कसने के लिए नहीं करना चाहिए। 
  3. स्पैनर को  हैमर से नहीं ठोकना चाहिए क्योकि इससे इसके टूटने का खतरा रहता है। 

सारांश - जब भी हम किसी स्पैनर का प्रयोग करें सावधानी के साथ करें और उचित स्पैनर का प्रयोग करना चाहिए इसको ठीक से पकड़ना चाहिए। और फिर जोर लगाना चाहिए।



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