साकेत महाकाव्य के रचयिता कौन थे

साकते महाकाव्य के रचियाता मैथिलीशरण गुप्त है। मैथिलीशरण गुप्त जी हिंदी साहित्य के दुवेदी युग के कवि हैं। और कोई भी कवि या साहित्यकार अपने युग से असंतृप्त रहकर नहीं लिख सकता। अतः गुप्त जी की रचनाएं भी युग सापेक्ष संवेदना और वस्तु को लिए हैं। 

उनका युग सुधार और इतिवृत्तात्मक संवेदना का युग है। अतः गुप्त जी के साहित्य में भी यह प्रवृत्ति और संवेदना उभर कर सामने आती है। 

कवि ने पौराणिक रामकथा के कुछ स्थलों को लेकर उनके आधार पर साकेत के कथानक की रचना की। है कुछ परंपरागत विद्वानों ने साकेत की विशेषता को आपेक्ष के रूप में प्रस्तुत किया है। 

कि गुप्तजी ने साकेत में रामायण के परित्यक्त, विस्मृत एवं उपेक्षित प्रसंगो व पात्रों को ही प्रकाश मिलाने का प्रयास किया है। तथाकथित विद्वानों का यह आक्षेप युगीन प्रभाव और कवि की समसामयिक प्रतिबद्धता की ओर संकेत करता है। 

विद्वानों का यह भी कहना है कि एक और कवि ने संपूर्ण राम-कथा भी कह देनी चाही और दूसरी ओर उपेक्षित स्थलों तथा पात्रों को भी उभारने की चेष्टा की है। इस दुवनदु में कथानक का संतुलन बिगड़ गया है और उसके सुनिश्चित प्रवाह में गतिरोध आ गया है। यह आरोप परंपराग्राही लोगों द्वारा लाया गया है। 

साकेत महाकाव्य के रचयिता कौन थे

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