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What is the Global Warming in Hindi

Hello and welcome साथियों आपने Global Warming in hindi के बारे में तो सुना होगा। आज मैं इसी के बारे में बातें करने वाला हूँ, ग्लोबल वार्मिंग क्या होता है और इससे कैसे निपटना है? क्या कारण है Global Warming का और इससे कैसे नुकसान पहुंच रहा है। इन सभी तमाम बातों पर आज मैं चर्चा करने वाला हूँ। 

global warming essay in Hindi

ग्लोबल वार्मिंग क्या है ?

Hey Friends आपने अनुभव किया होगा की हर साल हमारे लिए गर्मी का दिन बहुत ही तकलीफ वाला होता जा रहा है। जिसके कारण धूप में भी निकलना बहुत कठिन होता जा रहा है।  साथ ही साथ प्रदूषण भी ज्यादा होता जा रहा है की जीना मुश्किल होता जा रहा है आपने कई बार दिल्ली मुम्बई जैसे शहरों के प्रदूषण के बारे में भी सुना होगा की वहां कितना ज्यादा प्रदूषण का स्तर पहुंच चुका है। लोगों को गर्मी के दिनों में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

Global Warming in hindi

तो ग्लोबल वार्मिंग हमारे पृथ्वी पर पड़ने वाला ऐसा प्रभाव है जिसके कारण न तो प्रदूषण में कमी आ रही है और न ही तापमान में कमी आ रही है। तो इस प्रकार से ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) को परिभाषित किया जा सकता है जैसे की हमारे क्षेत्र का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है उसी प्रकार पूरे विश्व का या कहें लगातार पृथ्वी के तापमान में भी लगातार वृध्दि होती जा रही है।

"इस प्रकार साल दर साल पृथ्वी का तापमान का बढ़ना Global Warming कहलाता है। " क्या कारण है Global Warming का दोस्तो आपको बता दें की ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का मुख्य कारण कार्बन-डाइऑक्साइड, मेथेन तथा क्लोरो-फ्लोरो कार्बन की मात्रा में अनावश्यक वृद्धि है। जिसके कारण Global Warming बढ़ते जा रहा है। पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ते जा रहा है। जिसके कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त होता जा रहा है।

कार्बन-डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने के कारण 

दोस्तो जैसे की आप जानते है की अब बढ़ती जनसंख्या तथा अन्य कारणों के कारण पेड़-पौधों की संख्या लगातार कम होती जा रही जिसके कारण कार्बन-डाइऑक्साइड का उपयोग पौधों की संख्या कम होने से उचित मात्रा में नहीं हो पाता है और सन्तुलन बिगड़ता जा रहा है। इसके साथ ही और भी बहुत से कारण है जैसे हमारे द्वारा गन्दगी को बढ़ावा देना और साफ सफाई न रखना।

मेथेन की मात्रा क्यों बढ़ रही है?

हमारे द्वारा समुद्रों से निकाले जाने वाले विभिन्न प्रकार के ईंधनों के द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है और यह वायुमण्डल में तेजी से फैल रहा है जिसके कारण यहां के वातावरण में बहुत ही ज्यादा वृद्धि हो रही है आप जब खाना बनाते है किसी सिलेंडर में भरे गैस से तब आपने उसकी गर्मी जरूर महसूस की होगी की वह कितना गर्म होता है थी उसी प्रकार यही गैस पृथ्वी के तापमान को भी गर्म कर रहा है। इसका उत्पादन जानवरों द्वारा जैसे गाय और बैल के अपशिष्ट के द्वारा भी निकलता है और भी बहुत सारे कारण है जैसे की कारखाने के जल के द्वारा तथा उसके धुंए के कारण भी मेथेन गैस का निष्काशन किया जाता है।

CFC यानी क्लोरो फ्लोरो कार्बन

इस प्रकार के गैस का उत्पादन हमारे ओजोन परत के कम होने के कारण और अधिक बढ़ता जा रहा है। और ओजोन परत को हानि कार्बन डाईऑक्साइड तथा मेथेन से सबसे ज्यादा हो रहा है।

ग्लोबल वॉर्मिंग से बचने के उपाय

  1. इससे बचने के लिए गन्दगी कम करना होगा। 
  2. औद्योगिक उत्पादन को ज्यादा बढ़ावा न देते हुए मानव निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। 
  3. कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा को कम करने के लिए पौधे लगाए जाने चाहिए। 
  4. मेथेन गैस का उत्पादन सबसे ज्यादा द्रव्य ईंधन द्वारा होता इस कारण इसको कम करने के लिए उचित व्यवस्था करना चाहिए। 

Conclusion :-

  • यह सिर्फ हमारे देश की ही समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे विश्व की समस्या है इसको लेकर पूरे विश्व के द्वारा संगठन भी बनाये गए है और कई सारे ऐसे भी देश है जो की इसे अपने लिए बहुत ही ज्वलन्त समस्या बता रहे हैं। 
  • आपको बता दूँ की चीन में वायु प्रदूषण इस हद तक पहुच गया है की अब वहां शुद्ध हवा के लिए कैन का इस्तेमाल होने लगा है। अगर ऐसे ही स्थिति बनी रही तो वो दिन दूर नहीं है जब भारत जैसे देश में भी इसी प्रकार के कैन बिकने लगे।  
  • भारत में ऐसे तो अन्य देशों के हिसाब से बहुत ज्यादा मात्रा में खेती की जाती है जिसके कारण यहाँ अभी यह परेशानी सबसे ज्यादा गर्मियों के मौसम में देखने को मिलता है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज बड़े-बड़े बर्फ से बने ग्लेशियर पिघलने लगे हैं।  

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