Thursday, September 5, 2019

Sarvepalli Radhakrishnan and Teachers Day intresting Fact

शिक्षक दिवस Teachers Day

Hello friends नमस्कार शिक्षक दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

Second president of India





शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?

शिक्षक दिवस हमारे प्रथम उपराष्ट्रपति और दुतीय राष्ट्रपति के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म आज ही के दिन 5 सितम्बर 1888 को हुआ था। और जिनकी मृत्यु 17 अप्रेल 1975 को हुआ था। इन्ही के जन्म दिवस को याद करते हुए ये दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत सरकार ने भी उनको भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा है।

Sarvepalli Radhakrishnan 13 intresting Fact:-

1. राधाकृष्णन जी के नाम के आगे लगा 'सर्वपल्ली' नाम सम्मान नहीं है बल्कि गांव का नाम है और उनके पूर्वजों का मानना था की नाम के साथ गांव का नाम जुड़ा होना चाहिए इसलिए उनके परिजन अपने नाम के आगे सर्वपल्ली जोड़ते थे।

2. राधाकृष्णन जी ज्यादा धनी परिवार से नहीं थे और उन्होंने बचपन में बहुत कष्ट देखे थे।

3. मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने शिक्षा प्राप्त की थी जबकि इनके पिता धार्मिक प्रवित्ति के थे फिर भी उन्होंने शिक्षा को प्रथम मान्यता दी थी। 

4. दर्शन शास्त्र में एम०ए० करने के पश्चात् 1916 में वे मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र के सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए। बाद में प्रध्यापक पद पर भी रहे।

5. भारतीय दर्शन शास्त्र को विश्व से परिचित कराने का श्रेय सर्वपल्ली राधाकृष्णन को जाता है इन्होंने लोगों को अपने लेख और भाषण के माध्यम भारतीय शास्त्र को बढ़ावा दिया। जिससे विश्व में उनकी प्रशंसा हुई। 

6.1903 में जब राधाकृष्णन जी का विवाह हुआ तो उस समय उनकी आयु मात्र 16 वर्ष की थी और उनकी पत्नी की आयु 10 वर्ष थी। 

7. उनकी शादी के बाद उनकी पत्नी ने उनके साथ रहना तीन वर्ष बाद प्रारम्भ किया था। 

8. जब वे उच्च स्तर में पढाई कर रहे थे तब वे सेल्फ इनकम के लिए ट्यूशन पढाया करते थे।  

9.हिंदू धर्म को हेय दृष्टि से देखने और उनकी आलोचना करने वालो की प्रतिक्रिया को राधाकृष्णन ने चुनौती के रूप में लिया और हिन्दू शास्त्रों को गहराई से अध्ययन करना चालू कर दिया था। 





10. शादी के 6 वर्ष के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की थी। 

11. राधाकृष्णन जी ने जब ब्यख्याता के पोस्ट पर काम करना चालू किया तब उनका वेतन मात्र 37 रुपये था। 

12. जब राधाकृष्णन जी ने अपने लेक्चर में 13 तरह के ब्यखान दिए तब सभी उसके सहपाठी आश्चर्यचकित हो गए। 

13. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जब यूरोप एवं अमेरिका से लौटे तब कई वीश्वविद्यालय ने मानद उपाधियां प्रदान कर उनकी विद्वता को सम्मानित किया था। 

आपको ये जानकारियां कैसे लगी मेरे साथ जरूर शेयर करना। 

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