samas in hindi grammar समास किसे कहते है तथा प्रकार

समास हिंदी व्याकरण [samas in hindi grammar] का महत्वपूर्ण विषय है यहाँ बारहवीं और दसवीं के परीक्षा में अवस्य पूछा जाता है इसलिए हम आपके के लिए आसान भाषा  समझने का प्रयास करेंगे।

 समास किसे कहते है [What is the samas in hindi]

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं।
जैसे - नौ ग्रहों का समूह - नवग्रह।

◆ समास विग्रह - सामासिक शब्दों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है।
जैसे - राजपुत्र - राजा का पुत्र।

◆ सामासिक शब्द - समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं। समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं।
जैसे - राजपुत्र।

◆ पूर्वपद और उत्तरपद - समास में दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं।
जैसे - गंगाजल। इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद है।

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 समास के भेद [samas ke bhed]

1. अव्ययी भाव -

जिसका पहला पद अव्यय और दूसरा पद प्रायः संज्ञा हो तथा समस्तपद भी अव्यय हो, उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं। 

जैसे - विधि के अनुसार - यथाविधि। जन्म से लेकर - अजन्म। आंखों के सामने - प्रत्यक्ष। यथाशक्ति, प्रतिदिन, समक्ष, सम्मुख, व्यर्थ, निःसन्देह, अकारण, अभूतपूर्व, निडर, अनजाने, दरअसल, बेकार, बेहद, बेकसूर।

एक साथ ही किसी शब्द का दो बार प्रयोग करने से भी अव्ययी भाव समास होता है। जैसे - दिनों-दिन, धीरे-धीरे, पहले-पहल आदि।

2. तत्पुरुष -

इस समास का पहला पद संज्ञा होता है। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो जाता है। जैसे - चितकबरा, तटस्थ, जलद, गोबरगणेश।
  1. कर्म तत्पुरुष - शरण को आया - शरणागत। मरण को आसन्न - मरणासन्न।
  2. करण तत्पुरुष - सुर द्वारा कृत - सूरकृत। हस्त से लिखित - हस्तलिखीत। मुंहमांगा, दस्तकारी, कष्टसाध्य।
  3. सम्प्रदान तत्पुरुष - विद्या के लिए आलय - विद्यालय। हाँथ के लिए कड़ी - हथकड़ी। देवबलि, राहखर्च।
  4. अपादान तत्पुरुष - धर्म से विमुख - धर्मविमुख। रोग से मुक्त - रोगमुक्त। अन्य उदाहरण - बन्धनमुक्त, पदच्युत, लोकोत्तर, कामचोर, देशनिकाला, जातिभ्रश्ट।
  5. सम्बन्ध तत्पुरुष - भारत का वासी - भारतवासी। राजा का दूत - राजदूत। अन्य उदाहरण - अमचूर, गजराज, वनमानुष, रेलगाड़ी, नरेश, घुड़सवार, कन्यादान।
  6. अधिकरण तत्पुरुष - आनंद में मग्न - आनंदमग्न। आप पर बीती - आपबीती। लोक में प्रिय - लोकप्रिय। आत्म पर विश्वास - आत्मविश्वास। अन्य उदाहरण - कार्यकुशल, ग्रामवास।

3. कर्मधारय समास -

जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पड़ विशेष्य होता है। उपमेय और उपमान से मिलकर भी कर्मधारय बनता है। 

जैसे - नील + अम्बर - नीलाम्बर (विशेषण+विशेष्य) कमल के समान नयन - कमलनयन (उपमान+उपमेय अन्य उदाहरण - महाराज, परमानन्द, पुरुषोत्तम, भलमानस, पुच्छलतारा, कालापानी, चरणकमल। 'प्र' आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास भी इसके अंतर्गत आता है। जैसे - उपवेन्द्र, प्राचार्य, प्रगति, प्रसंग, प्रमत्त।


4. द्विगु -

यह समास समूह का धोत्तक होता है। इस समास में पहला पद संख्यावाची होता है। जैसे - दो गायों का समाहार - द्विगु। आठ अध्यायों का समाहार - अष्टाध्यायी। पांच तन्त्रों का समाहार - पंचतंत्र। अन्य उदाहरण - त्रिफला, पंचवटी, त्रिभुवन, चतुर्वण, चहारदीवारी, तिमाही, सतसई, पसेरी, दोपहर, चौराहा। 


5. द्वन्द्व -

इस समास में दोनों पद समान होते हैं, और दोनों के बीच ' और ' छिपा होता है। जैसे - माता और पिता - माता-पिता। पाप और पूण्य - पाप-पूण्य।अन्य उदाहरण - जीवन-मरण, भला-बुरा, ऊँच-नीच, पन्द्रह-बीस, दस-बारह, आमने-सामने, भला-चंगा।

6. बहुब्रीहि - 

इस समास में विद्यमान दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद प्रधान होता है। अर्थात समस्त पद किसी अन्य के रूप में प्रयुक्त होता है। जैसे - पीत है अम्बर जिसके (विष्णु) - पीताम्बर। चार है मुख जिसके (ब्रम्हा) - चतुर्मुख।अन्य उदाहरण - दशानन (रावण), मुरलीधर (कृष्ण), नीलकण्ठ (शिव), त्रिलोचन (शिव), पंचामृत।

● बहुब्रीहि समास की यह विशेषता है की उसके विग्रह में 'जिसने-वह', 'जिसे-वह', 'जो-वह', आदि शब्दों का प्रयोग होता है। जैसे - निर्मल - निर्गत है मल जिससे। चन्द्रमौलि - चंद्र है मौली पर जिसके ' सह ' (साथ) के अर्थ में ' स ' शब्द के साथ होने वाले समास को भी बहुब्रीहि समास कहते हैं। जैसे - सार्थक - अर्थ के साथ है जो।