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समास किसे कहते हैं - samas in Hindi

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समास हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है यहाँ बारहवीं और दसवीं के परीक्षा में अवस्य पूछा जाता है। 

समास किसे कहते हैं 

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं। जैसे - नौ ग्रहों का समूह - नवग्रह।

समास विग्रह किसे कहते हैं

सामासिक शब्दों के बीच के सम्बन्ध को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है। जैसे - राजपुत्र - राजा का पुत्र।

सामासिक शब्द - समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाते हैं। समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं। जैसे - राजपुत्र।

पूर्वपद और उत्तरपद - समास में दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। जैसे - गंगाजल। इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद है।

समास के भेद 

समास के 6 भेद होते है - अव्ययीभाव समास , तत्पुरुष समास , द्विगु समास , द्वन्द्व समास , बहुव्रीहि समास , कर्मधारय समास। 

1. अव्ययीभाव समास की परिभाषा

अव्ययीभाव समास - जिसका पहला पद अव्यय और दूसरा पद प्रायः संज्ञा हो तथा समस्तपद भी अव्यय हो, उसे अव्ययी भाव समास कहते हैं। 

जैसे - विधि के अनुसार - यथाविधि। जन्म से लेकर - अजन्म। आंखों के सामने - प्रत्यक्ष। यथाशक्ति, प्रतिदिन, समक्ष, सम्मुख, व्यर्थ, निःसन्देह, अकारण, अभूतपूर्व, निडर, अनजाने, दरअसल, बेकार, बेहद, बेकसूर।

एक साथ ही किसी शब्द का दो बार प्रयोग करने से भी अव्ययी भाव समास होता है। जैसे - दिनों-दिन, धीरे-धीरे, पहले-पहल आदि।

2. तत्पुरुष समास का अर्थ

तत्पुरुष समास  - इस समास का पहला पद संज्ञा होता है। इसमें दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो जाता है। जैसे - चितकबरा, तटस्थ, जलद, गोबरगणेश।

तत्पुरुष समास के भेद उदाहरण सहित

कर्म तत्पुरुष - शरण को आया - शरणागत। मरण को आसन्न - मरणासन्न।

करण तत्पुरुष - सुर द्वारा कृत - सूरकृत। हस्त से लिखित - हस्तलिखीत। मुंहमांगा, दस्तकारी, कष्टसाध्य।

सम्प्रदान तत्पुरुष - विद्या के लिए आलय - विद्यालय। हाँथ के लिए कड़ी - हथकड़ी। देवबलि, राहखर्च।

अपादान तत्पुरुष - धर्म से विमुख - धर्मविमुख। रोग से मुक्त - रोगमुक्त। अन्य उदाहरण - बन्धनमुक्त, पदच्युत, लोकोत्तर, कामचोर, देशनिकाला, जातिभ्रश्ट।

सम्बन्ध तत्पुरुष - भारत का वासी - भारतवासी। राजा का दूत - राजदूत। अन्य उदाहरण - अमचूर, गजराज, वनमानुष, रेलगाड़ी, नरेश, घुड़सवार, कन्यादान।

अधिकरण तत्पुरुष - आनंद में मग्न - आनंदमग्न। आप पर बीती - आपबीती। लोक में प्रिय - लोकप्रिय। आत्म पर विश्वास - आत्मविश्वास। अन्य उदाहरण - कार्यकुशल, ग्रामवास।

3. कर्मधारय समास की परिभाषा

कर्मधारय समास - जिसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पड़ विशेष्य होता है। उपमेय और उपमान से मिलकर भी कर्मधारय बनता है।

कर्मधारय समास का उदाहरण

जैसे - नील + अम्बर - नीलाम्बर (विशेषण+विशेष्य) कमल के समान नयन - कमलनयन (उपमान+उपमेय अन्य उदाहरण - महाराज, परमानन्द, पुरुषोत्तम, भलमानस, पुच्छलतारा, कालापानी, चरणकमल। 'प्र' आदि उपसर्गों तथा दूसरे शब्दों का समास भी इसके अंतर्गत आता है। जैसे - उपवेन्द्र, प्राचार्य, प्रगति, प्रसंग, प्रमत्त।

4. द्विगु समास का अर्थ

द्विगु समास - यह समास समूह का धोत्तक होता है। इस समास में पहला पद संख्यावाची होता है। जैसे - दो गायों का समाहार - द्विगु। आठ अध्यायों का समाहार - अष्टाध्यायी। पांच तन्त्रों का समाहार - पंचतंत्र। 

द्विगु समास के 10 उदाहरण - त्रिफला, पंचवटी, त्रिभुवन, चतुर्वण, चहारदीवारी, तिमाही, सतसई, पसेरी, दोपहर, चौराहा। 

5. द्वंद समास की परिभाषा

द्वन्द्व समास - इस समास में दोनों पद समान होते हैं, और दोनों के बीच ' और ' छिपा होता है। जैसे - माता और पिता - माता-पिता। पाप और पूण्य - पाप-पूण्य। 

द्वन्द्व समास के उदाहरण - जीवन-मरण, भला-बुरा, ऊँच-नीच, पन्द्रह-बीस, दस-बारह, आमने-सामने, भला-चंगा।

6. बहुव्रीहि समास का अर्थ

बहुब्रीहि समास - इस समास में विद्यमान दोनों पदों के अतिरिक्त अन्य पद प्रधान होता है। अर्थात समस्त पद किसी अन्य के रूप में प्रयुक्त होता है। जैसे - पीत है अम्बर जिसके (विष्णु) - पीताम्बर। चार है मुख जिसके (ब्रम्हा) - चतुर्मुख।अन्य उदाहरण - दशानन (रावण), मुरलीधर (कृष्ण), नीलकण्ठ (शिव), त्रिलोचन (शिव), पंचामृत।

बहुब्रीहि समास की यह विशेषता है की उसके विग्रह में 'जिसने-वह', 'जिसे-वह', 'जो-वह', आदि शब्दों का प्रयोग होता है। जैसे - निर्मल - निर्गत है मल जिससे। चन्द्रमौलि - चंद्र है मौली पर जिसके ' सह ' (साथ) के अर्थ में ' स ' शब्द के साथ होने वाले समास को भी बहुब्रीहि समास कहते हैं। जैसे - सार्थक - अर्थ के साथ है जो।

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