Monday, January 28, 2019

रस हिन्दी व्याकरण(Ras Hindi grammar)

 हेलो दोस्तों यह जनरल हिंदी का दूसरा पाठ है इसमें हम रस के बारे में जानेगे रास क्या होता है और रस कितने प्रकार के होते है सामान्य भाषा  में कहे तो रस, काव्य के पढ़ने  अथवा सुनने  एवं देखने से जो अलौकिक आनन्द मिलता  है, वही  रस कहलाता है।

रस की परिभाषा -श्रव्य काव्य के पठन अथवा श्रवण एवं दृश्य काव्य के दर्शन तथा श्रवण में जो अलौकिक  या संसार से परे आनन्द प्राप्त होता है, वही काव्य में रस (आनन्द) कहलाता है। रस से जिस भाव की अनुभूति (अनुभव) होती है वह रस का स्थायी  (तुरन्त ना मिटने वाला )भाव होता है।



रस का शाब्दिक अर्थ क्या है ?

रस का शाब्दिक अर्थ है - निचोड़ (सार)। काव्य में जो आनन्द आता है वह ही काव्य या कविता का रस है। काव्य में आने वाला आनन्द अर्थात् रस लौकिक या सांसारिक न होकर अलौकिक सँसार से परे होता है। रस काव्य की आत्मा है।

प्र. रस के कितने अंग होते है?

उत्तर. रस के चार अवयव या अंग होते हैं :-




  1. विभाव
  2. अनुभाव
  3. संचारी भाव
  4. स्थायीभाव


इसे भी पढ़े दोहा अर्थ सहित
Doha kya hai, Doha arth sahit

1. विभाव

जब कोई व्यक्ति अन्य व्यक्ति के ह्रदय के भावों को जगाता हैं उन्हें विभाव कहते हैं। इनके कारण से रस प्रकट होता है यह कारण निमित्त कहलाते हैं। विशेष रूप से भावों को प्रकट करने वालों को विभाव रस कहते हैं। इन्हें कारण रूप भी कहते हैं।

2. अनुभाव-

वाणी और अंगों के अभिनय द्वारा जिनसे किसी अर्थ प्रकट होता है उन्हें अनुभाव कहते हैं। अनुभवों की कोई संख्या निश्चित नहीं होती है। 

जो आठ अनुभाव सरल और सात्विक के रूप में आते हैं उन्हें सात्विक भाव कहते हैं। ये अनायास सहज रूप से प्रकट होते हैं |




 इनकी संख्या आठ होती है।

  1. स्तंभ
  2. स्वेद
  3. रोमांच
  4. स्वर – भंग
  5. कम्प
  6. विवर्णता
  7. अश्रु
  8. प्रलय

3. संचारी भाव-

जो स्थानीय भावों के साथ संचरण करते हैं वे संचारी भाव कहलाते हैं। इससे स्थिति भाव की पुष्टि (सत्यापित) होती है। एक संचारी किसी स्थायी भाव के साथ नहीं रहता है इसलिए इसे व्यभिचारी भाव भी कहते हैं। इनकी संख्या 33 मानी जाती है

4. स्थाई भाव 

किसी मनुष्य के हृदय में कोई भी भाव स्थाई रूप से निवास करती है उसे स्थाई भाव कहते है यह चाद भर के लिए न रहकर स्थाई रूप से रहता है।

रस के प्रकार स्थाई भाव ?

रस के 10 प्रकार होते है।

1.शृंगार रस - रती( प्रिम)

2.हास्य रस - हास 

3.शान्त रस - निर्वेद

4.करुण रस - शोक

5.रौद्र रस - क्रोध

6.वीर रस - उत्साह

7.अद्भुत रस - आश्चर्य

8.वीभत्स रस - घृणा

9.भयानक रस - भय

10. वात्सल्य रस - स्नेह





रस के बारे में अधिक जानकारी के लिए हम आगे इसके बारे में और पोस्ट लिखेंगे ।

No comments:

Post a Comment

Thanks for tip