Sunday, January 27, 2019

दोहा किसे कहते हैं?

आज मैं आप लोगो को हिंदी जनरल का फोर्थ पार्ट में दोहा के बारे में बताने वाला हूं तो इस ब्लॉग को पूरा पढ़िए अगर आप 10 वी या 12वी में  है तो आप के लिए यह ब्लॉग बहुत फायदे का हो सकता है।

Doha ka arth arth paribhasa hindi me

दोहे का अर्थ एवं परिभाषा

दोहा एक मासिक छंद है जिसके प्रथम और तृतीय चरण में 13,13 मात्राएं होती है।और दूसरे और अंतिम चरण में 11,11 मात्राएं होती है।इसमें 24 ,24 मात्रा की दो पंक्तियां होती है।

दोहा को कैसे पहचाने?

दोहा में 24,24 मात्रा की दो पंक्ति होती है तथा अंतिम में एक गुरु और (s की तरह ) एक लघु (l की तरह) होता है।

इसे भी पढ़े - रस हिन्दी व्याकरण(RASH HINDI GRAMMAR)


दोहा अर्थ सहित

बुरा जो देखन में चला


अर्थ: जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न मिला। जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है।

पोथी पड़ी पड़ी जग मुआ




अर्थ: इस दोहा में बताया गया है की बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ ले। वह लोग मृत्यु के द्वार पहुँच जाते है, पर सभी विद्वान नही बन पते। कबीर कहते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर हको अच्छी तरह से समझ जाये तो उससे बड़ा कोई ज्ञानी नहीं होता, अर्थात प्यार को  वास्तविक रूप में पहचान ले वही सच्चा ज्ञानी होगा।

साईं इतना दीजिए

अर्थ - इस दोहे में कबीर दास जी भगवान से विनती करते हुए कहते हैं.  "हे ईश्वर! मेरे ऊपर इतनी कृपा बनाए रखना कि मेरे परिवार का भरण-पोषण अच्छे से होता रहे. मैं ज्यादा धन की इच्छा नहीं रखता. बस इतनी नजर रखना कि मेरा परिवार और मैं भूखा ना सोए और मेरे दरवाजे पर आने वाला कोई भी जीव भूखा ना जाए."




अर्थ: मनुष्य को समझाते हुए कबीर जी कहते हैं कि मन की इच्छाएं छोड़ दो, उन्हें तुम अपने बाल बूते पर पूर्ण नहीं कर सकते। यदि पानी से घी निकल आए, तो रूखी रोटी कोई नहीं खाएगा।



अर्थ: कबीर जी कहते है, की सज्जन की जाती नहीं पूछनी चाहिए उसके ज्ञान को समझना चाहिए। तलवार का मूल्य होता है न कि उसकी मयान का – उसे ढकने वाले खोल का।






अर्थ: पतिव्रता स्त्री यदि तन से मैली भी हो भी अच्छी है. चाहे उसके गले में केवल कांच के मोती की माला ही क्यों न हो. फिर भी वह अपनी सब सखियों के बीच सूर्य के तेज के समान चमकती है !



अर्थ: प्रेम खेत में नहीं उपजता प्रेम बाज़ार में नहीं बिकता चाहे कोई राजा हो या साधारण प्रजा – यदि प्यार पाना चाहते हैं तो वह आत्म बलिदान से ही मिलेगा. त्याग और बलिदान के बिना प्रेम को नहीं पाया जा सकता. प्रेम गहन- सघन भावना है – खरीदी बेचे जाने वाली वस्तु नहीं !

अर्थ: दाह क्रिया में हड्डियां जलती हैं उन्हें जलाने वाली लकड़ी जलती है उनमें आग लगाने वाला भी एक दिन जल जाता है. समय आने पर उस दृश्य को देखने वाला दर्शक भी जल जाता है. जब सब का अंत यही हो तो पनी पुकार किसको दू? किससे  गुहार करूं – विनती या कोई आग्रह करूं? सभी तो एक नियति से बंधे हैं ! सभी का अंत एक है !

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