Tuesday, December 25, 2018

chhattisgarhi bhasha ewam vyakran se sambandhit pariksha upyogi tathyo

साथियों आपका स्वागत करता हूँ मेरे ब्लॉग में आज मैं आपके लिए छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान से जुड़ी एक जानकारी लेकर आया हूँ जिसमें में कम्पीटीशन परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्न से सम्बंधित कुछ टॉपिक के बारे में बताया है तो चलिए शुरू करताहूँ इससे पहले की मैं इस टॉपिक की शुरुआत करूँ आपको बता दूँ इससे पहले मैंने एक छत्तीसगढ़ी व्याकरण के बारे में बताया था। जिसमें मैंने छत्तीसगढ़ी भाषा में साहित्य के विकास के बारे में बताया था।  छत्तीसगढ़ की बोलियाँ। 
छत्तीसगढ़ी भाषा का उद्भव एवं विकास के बारे में बताया था।

exam structure basde  

छत्तीसगढ़ी भाषा प्रथम व्याकरणाचार्य - हीरालाल काव्योपाद्याय।
छत्तीसगढ़ी भाषा का शास्त्रीय अध्ययन  -   शंकरनाथ शेष।
छत्तीसगढ़ी भाषा का उदविकास  -  आचार्य नरेंद्र देव
छत्तीसगढ़ी बोली व्याकरण एवं कोष  -  कांतिकुमार।
छत्तीसगढ़ी शब्दकोष रमेश चन्द्र मेहरोत्रा
छत्तीसगढ़ी के प्रथम कवि   -   नरसिंह दास वैष्णव। 
छत्तीसगढ़ी की प्रथम कवयित्री  -  निरुपमा शर्मा ( सोना बाई )
छत्तीसगढ़ी के व्याकरणाचार्य   -   हीरालाल कावयोपाध्याय ( 1890 )
छत्तीसगढ़ी के पाणिनी  -   हीरालाल कावयोपाध्याय।
छत्तीसगढ़ी बाल्मिकी  -   गोपाल मिश्र।
छत्तीसगढ़ी के नीलकण्ठ  -   गजानंद माधव मुक्तिबोध।
छत्तीसगढ़ी के विद्यासागर - रामदयाल तिवारी
छायावाद के जनक  -   मुकुटधर पाण्डेय। ( कुर्री के प्रति )
छत्तीसगढ़ी के प्रथम कहानीकारबंशीधर पाण्डेय। ( हीरु के कहनीज )
छत्तीसगढ़ी के प्रथम नाटककार  -   लोचन प्रसाद पाण्डेय  ( कलिकाल 1905 )
छतीसगढ़ी के प्रथम निबन्धकार केयूर भूषण ( रांडी ब्राम्हण की दुर्दशा )
छत्तीसगढ़ी के प्रथम गद्धलेखन की शरुआत   -   लोचन प्रसाद पाण्डेय।
छत्तीसगढ़ी के प्रथम व्यंग्य लेखन की शुरुआत  -  शरद कोठारी।
शब्दकोश
छत्तीसगढ़ी-हिंदी शब्दकोशछत्तीसगढ़ी राज्य भाषा आयोग।
हिंदी-छत्तीसगढ़ी शब्दकोश  - छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग।
छत्तीसगढ़ी शब्दकोश  -  डॉ . चन्द्रकुमार चन्द्राकर
छत्तीसगढ़ी हिंदी शब्दकोष - डॉ. पालेश्वर शर्मा।
छत्तीसगढ़ी व्याकरण और कोष  के लेखक - डॉ. क्रांतिकुमार
छत्तीसगढ़ी भाषा का शास्त्रीय अध्ययन - शंकर शेष।
छत्तीसगढ़ी में लोक साहित्य का अध्ययन के लेखक  - दयाशंकर शुक्ल।
हल्बी बोली में लोक कथाओं का संग्रह   -   लाला जगदलपुरी।
मेरे हिसाब से छत्तीसगढ़ी भाषा बोली के रचनाकार को उन्हें विभेदकर ( काव्य रचनाकार , उपन्यास, कहानी, नाटक आदि ) अध्ययन करें।

नोट - व्यक्ति आधार पर रचनाकार का विस्तृत वर्णन हमारी वेबसाइट में आगे प्रकाशित करेंगे इसलिए आप इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अच्छा लगे तो सब्सक्राइब जरूर करें ताकि आपके पास हमारा पोस्ट जल्दी पहुंच सके।

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ी महाकाव्य - श्री रामकथा, श्री कृष्णकथा , श्री महाभारत कथा के रचनाकार श्री प्रणयन जी हैं तथा कपिलनाथ कश्यप जी ने भी छत्तीसगढ़ी में महाकाव्य की रचना किये हैं।
अगले पोस्ट में पढ़े छत्तीसगढ़ी के काव्यकार एवम् उनकी रचनाएँ।

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