piston kya hai पिस्टन किस धातु का बना होता है - डिजल मकैनिक

piston kya hai kis padarth ka bna hota hai hindi me

मैं आपका स्वागत करता हूँ इंजन के मुख्य पार्ट piston की जानकारी आपके समक्ष प्रस्तुत है। 

What is Piston पिस्टन क्या है ?

piston  इंजन का एक पार्ट का नाम है जो की सिलेंडर के अंदर ऊपर नीचे होता रहता है। इसके ऊपर नीचे चलने से ही इंजन में सक्सन , कम्प्रेशन, पावर तथा एक्जास्ट स्ट्रोक पूरे होते हैं। इंजन में जब सबसे पहले शक्ति उत्पन्न होती है तो piston को ही सबसे पहले तेज झटके का सामना करना पड़ता है । इसलिए इसको बनाते समय धातु का चुनाव सोच- समझ के करना चाहिए। आप किसी भी प्रकार के धातु का चयन करें उसमें ये गुण निश्चित रूप से होना चाहिए।

  1. उसमें लचीलापन होना चाहिए और साथ ही टूटना नहीं चाहिए।
  2. पिस्टन को चिकना किया जा सके इस प्रकार का होना चाहिए।
  3. पिस्टन मुलायम धातु का बना होना चाहिए।
  4. पिस्टन का भार हल्का होना चाहिए।
  5. पिस्टन के चलते समय अधिक आवाज नहीं करना चाहिए।
  6. पिस्टन इस प्रकार होना चाहिए की अधिक गर्मी पाने पर भी उसे उसके आयतन में ज्यादा फैलना नही चाहिए।
  7. इसकी स्कट इस प्रकार होनी चाहिए की इसमें ज्यादा घिसावट ना हो।
  8. इसको जंक रोधी होना बहुत जरूरी है। क्योकि जंग लगने पर धातु का उम्र कम हो जाता है।
  9. ऊष्मा का अच्छा शुचालक होना चाहिए।
  10. इस प्रकार के धातु का चुनाव करना चाहिए जो की अधिक मंहगा ना हो और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
  11. पिस्टन मटेरियल इस प्रकार होना चाहिए की झटके सहन कर सके।
ये सभी पिस्टन के गुण हैं जो की पिस्टन में होना ही चाहिए।




पिस्टन बनाने के लिए मटेरियल 

 पिस्टन को ज्यादातर एल्युमिनियम एलॉय के बनाये जाते हैं लेकिन कई कारणों से इसे कास्ट आयरन सेमी स्टील से भी बनाया जाता है। कास्ट आयरन का विस्तार का गुण कम होता है इसलिए इसको बनाते समय क्लियरेंस कम रखा जाता है। एल्युमिनियम का गलनांक बिंदु कम होता है इसलिए ये उचित होता है। तथा ये हल्की धातु है जिसके कारण इसमें विस्तार अधिक होता है और इसलिए क्लियरेंस अधिक रखा जाता है।

एल्युमिनियम एलॉय के piston में निम्न पदार्थ प्रतिशत मात्रा में पाये जाते हैं-

1. एल्युमिनियम - 91% पाया जाता है। 2.टिन - 2% पाया जाता है। 3.कॉपर - 7% पाया जाता है।
    अब आपको बताते हैं की पिस्टन में विस्तार का नियंत्रण कैसे किया जाता है - सिलेंडर में फायरिंग के समय पिस्टन का अधिक मात्रा में विस्तार होता है इसको नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती है। जबकि सिलेंडर को हवा या पानी की सहायता से उसे ठण्डा कर उसके विस्तार को नियंत्रित किया जा सकता है। इस प्रकार piston के ठण्डा ना होने से उसके सिलेंडर में फस जाने का खतरा रहता है। इस प्रकार इसके विस्तार को नियंत्रित करने के लिए निम्न उपायों का प्रयोग करना चाहिए
    1. पिस्टन स्लॉट बनाना।
    2. पिस्टन में हीट डैम बनाना।
    3. पिस्टन के कैम ग्राइंडिंग से नियंत्रण करना।
     अब इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है -

    1. पिस्टन स्लॉट 

     piston के विस्तार को रोकने के लिए पिस्टन में T आकार का स्लॉट या अन्य प्रकार के स्लॉट ( खांचे ) बनाये जाते है जो की उसके विस्तार को नियंत्रित करता है। विस्तार को रोकने के लिए उसकी स्कर्ट स्लॉट काट दिए जाते हैं। होरीजोंटल स्लॉट काट दिए जाने से ऊष्मा उसके स्कर्ट में आने नहीं पाता है और रुक जाता है और वर्टिकल स्लॉट पिस्टन विस्तार के समय पिस्टन के व्यास को बढ़ने से रोकता है और ज्यादा बढ़ने नहीं देता है।




    2. पिस्टन हिट डैम 

    इस प्रकार के विधि में पिस्टन के ऊपरी भाग में एक खांचा बनाया जाता है जो की पिस्टन हैड की ऊष्मा को नीचे स्कर्ट में आने से रोकती है। इससे पिस्टन स्कर्ट कम गर्म होता है। और इसके फलस्वरूप पिस्टन विस्तार कम होता है।

    3. पिस्टन का कैम ग्राइंडिंग 

    इसको पिस्टन के फिनिशिंग के समय उसे ग्राइंड करके परिधि को कुछ दीर्घवृत्तीय बना दिया जाता है। जब इंजन चलना स्टार्ट होता है पिस्टन के गर्मी पिस्टन बॉस की तरफ जाकर पिस्टन को पूर्ण रूप से गोल कर देता है।

    पिस्टन की बनावट

    piston बेलनाकार होता है। इसके ऊपरी भाग में दो खांचे बने होते है। जिसमें पिस्टन रिंग को फिट किया जाता है इसके ऊपरी भाग में कॉम्प्रेशन रिंग को फिट किया जाता है तथा नीचे वाले खांचे में ऑयल रिंग को फिट किया जाता है। यह ऑयल रिंग लुब्रिकेशन के समय ऑयल को ऊपर नीचे जाने से रोकता है। ये रिंग सिलेंडर की दीवारों से चिपककर लगे होते है।

    पिस्टन की स्कर्ट के बीच में एक आर-पार छेद पाया जाता है जिसे piston बॉस कहते हैं इस पिस्टन बॉस में गजन पिन लगा होता है। इस गजन पिन में कनेक्टिंग रॉड के स्माल एण्ड को जोड़ा जाता है। और कनेक्टिंग रॉड के दूसरे सिरे को कैम शाफ्ट से जोड़ा जाता है जिसे बिग एण्ड कहते हैं। पिस्टन का व्यास सिलेंडर के व्यास से कुछ कम होता है। क्योकि कोई भी धातु गर्मी पाकर अपने आयतन को बढ़ा लेता है। पिस्टन भी फायरिंग की गर्मी को पाकर फैल जाता है। यदी पिस्टन और सिलेंडर की दीवार के बीच गेप ना हो तो piston के जाम होने का खतरा बना रहता है और यह कभी भी जाम हो सकता है।

    इनके बीच की दूरी को साइड क्लियरेंश कहा जाता है, यह साइड क्लियरेंस पिस्टन के कास्ट आयरन तथा स्टील आयरन के एक इंच नाप पर 0.001'' रखा जाता है। एल्युमिनियम एलॉय के पिस्टन अधिक फैलते हैं इस कारण ऐसे पिस्टन के बीच 0.002'' से 0.004'' तक अंतर रखना जरूरी होता है। piston का घेरा स्कर्ट कहलाता है। प्रायः यह ऊपर से नीचे तक गोल रहता है कुछ पिस्टनों के स्कर्ट मे झिर्री काट दिया जाता है ताकि वो फैले नहीं। जिससे उसके फैलकर जाम होने का खतरा कम हो जाता है।




    दोस्तों इसके बाद हम पढ़ने वाले हैं पिस्टन के दोष और उसके निवारण के बारे में इसके लिए अगले पोस्ट को देख सकते है। इस पोस्ट में मैं ज्यादा नहीं लिख रहा हूँ क्योकि आपको भी पढ़ने में आसानी हो और समझ में भी आये।

    Thanks for reading piston kya hai 

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