Main part of bike full details in hindi

 MAIN PART OF BIKE

दोस्तों आज मैं आपके सामने दो पहिया वाहन के प्रमुख पुर्जे के बारे में बताने जा रहा हूँ दोस्तों आज का युग को अगर वाहनों का युग कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति की बात नहीं होगी क्योंकि आज के आधुनिक युग में हर किसी के पास एक या एक से अधिक गाड़ी है और आप सभी कुछ ना कुछ उसके बारे में जानते ही होंगे। तो चलिए बात चालू करते हैं

     Bike main part full detail hindi

THERE ARE MAIN PARTS OF BIKE

स्पार्क प्लग-

दोस्तों ये छोटा सा पार्ट है लेकिन इसके बिना आपकी गाड़ी स्टार्ट नहीं हो सकती है क्योंकि यह इग्निशन प्रणाली का एक हिस्सा है जो की कम्बश्चन चैम्बर यानी प्रज्वलन कक्ष में स्पार्क पैदा करता है। यह स्पार्क इसलिये पैदा करता है क्योंकि इसके अर्थ इलेक्ट्रोड था मुख्य इलेक्ट्रोड के बीच थोड़ा गेप रखा जाता है।
जब आप इंजन को स्टार्ट करते हैं तो इसमें लगे एच टी कॉयल द्वारा पैदा हुई वोल्टेज और करेंट इलेक्ट्रोड के बीच एक चिंगारी या स्पार्क तैयार करता है और सिलैण्डर के अंदर मौजूद वायु और ईंधन के मिश्रण को प्रज्वलित करता है, स्पार्क प्लग सिलेंडर हैड में लगता है एच टी कॉयल को करेंट मेग्नेटों से प्राप्त होता है स्पार्क प्लग गर्मी का भी संचरण करता है।  

सिलेण्डर हैड :

                     सिलेण्डर ब्लॉक के ऊपरी सिरे को सिलेण्डर हैड ढकता है इसमें कम्बश्चन चैम्बर केविटी यानि प्रज्वलन कक्ष का गड्ढा होता है जिसमें वायु और ईंधन का मिश्रण जलता है।
2 स्ट्रोक इंजन के सिलेण्डर हैड में केवल कम्बश्चन चैम्बर और स्पार्क प्लग होता है जबकी 4 स्ट्रोक इंजन के सिलेण्डर हैड में स्पार्क प्लग होता है तथा कम्बश्चन चैंबर के अतिरिक्त उसमें इनलेट तथा एक्जॉस्ट वॉल्व, हवा के पैसेज, कैमशाफ्ट, रॉकर आर्म , रॉकर शाफ्ट, लुब्रिकेशन के लिए ऑयल गैलरी इत्यादि होती है।


सिलेंडर ब्लॉक :

                     सिलेण्डर ब्लॉक में गोलाकार छेद होता है जो की पिस्टन को आधार प्रदान करता है और जब वह ऊपर नीचे होता है तो उसे अपनी स्थिति से हटने नहीं देता है। सिलेंडर हैड और सिलेण्डर ब्लॉक मिलकर कम्बश्चन चैम्बर का निर्माण करते हैं। जिसमें ताजे वायु और ईंधन के मिश्रण को चूसकर दबाया जाता है तथा प्रज्वलित किया जाता है।
2 स्ट्रोक इंजन में ट्रान्सफर पोर्ट यानी की हवा जाने का रास्ता तथा इंटेक पोर्ट यानी हवा आने का रास्ता दोनो होता है।
4 स्ट्रोक इंजन के सिलेंडर ब्लॉक में कोई पोर्ट या रास्ता नहीं होते हैं यह एक साधारण गोलाकार बोर होता है इसमें कैंम चेन तथा चेन टेंशनर लगता है।

वॉल्व :

        यह इंजन के हवा को तथा इसमें जलने के बाद निर्मित हवा को आने जाने का रास्ता होता है। तथा यह उचित समय पर खोले और बन्द किये जाते हैं प्रति सिलेंडर दो वॉल्व होते है, एक इनलेट तथा एक एक्जॉस्ट वॉल्व।

कैम शॉफ्ट तथा रॉकर आर्म :

                                  कैम शाफ्ट तथा रॉकर आर्म का  उपयोग वॉल्वो को खोलने में होता है कैम शौफ्ट के लोब रॉकर आर्म के एक सिरे को उचकाते हैं , तथा रॉकर आर्म का दूसरा सिरा वॉल्व को दबा कर उसे खोलता है, जब लोब वाला सिरा रॉकर आर्म से दूर हत जाता है तब रिटर्न स्प्रिंग वॉल्व को पीछे धक्का देकर उसे बन्द कर देता है।

पिस्टन :

          यह इंजन का मुख्य पार्ट से भी मुख्य पार्ट है क्योकि इस पार्ट के माध्यम से ही इंजन को ताकत मिलती है। पिस्टन बोर के अंदर उपर नीचे चलता है जब पिस्टन बोर के अन्दर ईंधन और वायु का मिश्रण जलता है तो वहां पर बल लगता है।  जिसके कारण वह नीचे की ओर गति करने लगता है। और इससे जुड़े कनैक्टिंग रॉड के द्वारा कैमशाफ्त को घुमाव प्रदान करता है। चलते हुए सिलेण्डर तथा पिस्टन के बीच दबाव बनाये रखने के लिए प्रेशर टाईम सील के रूप में पिस्टन रिंग का प्रयोग किया जाता है। जो की पिस्टन को air tight रखता है। 

कनेक्टिंग रॉड :

                    यह पिस्टन के नीचे होता है तथा पिस्टन के गजन पिन और क्रेंकशाफ्त के क्रेंकपिन द्वारा क्रैंकशॉफ्त  को जोड़ता है। और पिस्टन के ऊपर नीचे होने पर यह क्रेंकशॉफ्त को घुमाव गति प्रदान करता है।

क्रैंकशॉफ्ट :

                पिस्टन तथा कनेक्टिंग रोड द्वारा शक्ति प्राप्त कर के क्रैंकशॉफ्ट , क्लच से होते हुए गियर बॉक्स द्वारा इस शक्ति को प्रवाहित करती है इसके अलावा क्रैंकशॉफ्ट विधुत पैदा करने के लिए मैग्नेटों को घुमाता है। वॉल्व को नियंत्रित करने के लिए कैमशॉफ्ट को भी घुमाता है।

क्रैंककेस:

            यह इंजन का मुख्य भाग होता है जिसमें क्रेंकशॉफ्ट , क्लच , गियर ट्रान्समिशन आदि लगे होते है, साथ ही यह इंजन ऑयल के लिए छोटे सम्प यानी हौद का भी काम करता है।

क्लच :

        चालक की इच्छा के अनुशार स्पीड को कण्ट्रोल करने के लिए क्रैंकशॉफ्ट से होते हुए गियर बॉक्स को स्थानांतरित होने वाली शक्ति को आगे जाने देने अथवा रोकने के लिए इसका उपयोग होता है इसमें फ्रिक्शन प्लेट तथा स्टील की प्लेटें आदि होती हैं।

गियर ट्रांसमिशन :

                          गियर ट्रान्समिशन में इनपुट ,आउटपुट शॉफ्ट , स्पीड गियर आदि होते है,इसका कार्य इंजन के घुमाव को पिछले पहिये को भेजना है-
-खींचने की शक्ति बढ़ाने के लिए
-रफ़्तार बढ़ाने के लिए
इनपुट शॉफ्ट क्लच से शक्ति प्राप्त करती है, तथा आउटपुट शॉफ्ट प्राप्त शक्ति को स्पॉकेट तथा चैन के माध्यम से पछले फिहिए को स्थानांतरित करता है।

मैग्नेटो असेम्बली:

                      यह असेम्बली इग्निशन , लाइटिंग, हॉर्न आदि के लिए विधुत प्रदान करता है इसको ताँबे की क्वाइल लपेटकर बनाया जाता है और इसके साथ एक स्टेटर प्लेट होता है तथा एक रॉटर क्रैंकशॉफ्ट पर कसा होता है।

कार्ब्यूरेटर:

              यह एक ऐसा उपाय है जो की इंजन की भिन्न भिन्न गति को संचालित करने के लिए हवा के मिश्रण को आवश्यकता के अनुशार इंजन में इग्निशन के लिए भेजता है। 

फ्रेम या ढांचा :

                यह bikes का रीड़ की हड्डी कह सकते हैं क्योंकि इसी में इंजन , सस्पेंशन ,पेट्रोल टैंक , फिहिए और विधुतीय उपकरण तथा अन्य बॉड़ी पार्ट लगे होते हैं। इसको आम भाषा में चैचिश कहा जाता है। आमतौर पर यह स्टील ट्यूब का बना होता है, जबकि स्कूटर का फ्रेम चादरों का बना होता है। इनके बनावट के आधार पर निम्न प्रकारों में बांटा गया है।
- डबल क्रेडल ( ये पल्सर में लगा होता है )
- सैमी डबल क्रेडल ( बॉक्सर में लगा फ्रेम )
- अंडर बोन प्रकार का ( सफायर )
- मोनो कॉक प्रकार का ( चेतक लीजेण्ड एम-80 में लगा चेचिश )

स्विंग आर्म / ट्रेलिंग आर्म :

             यह वह आर्म है जो पिछले फहिए को फ्रेम से जोड़ता है इसका अगला सिरा बुश तथा बोल्ट की सहायता से और पिछला सिरा शॉक एब्जोर्बरों   द्वारा जुड़ा रहता है यह पिछले सस्पेंशन के हिस्से के रूप में कार्य करता है।

कंट्रोल पैनल :

            यह हैण्डल बार के सामने लगे मीटरों का एक समूह है या क्लस्टर होता है इस क्लस्टर में स्पीडोमीटर टैकोमीटर फ्यूल मीटर , पाइलट इंडीकेटर लाईट इत्यादि शामिल होते हैं।

बैटरी :

    बैटरी मूल रूप से ऊर्जा एकत्रित करके रखने का एक उपाय है ऊर्जा प्रतिक्रिया  करने वाले रासायनिक पदार्थों के रूप में रहती है, आवश्यकता पड़ने पर यह एकत्रित ऊर्जा , विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। ' ड्राय चार्ज बैटरी ' निर्माण के बाद 70% तक चार्ज किये जाते हैं तथा पूर्ण रूप से सक्षम बनाने के लिए उसे 6 - 10 घण्टे की आरम्भिक चार्जिंग ( प्रयोग में लाने से पहले ) की प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक होता है।

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आपको जानकारी कैसे लगी मुझे कमेंट करके जरूर बताएं ताकि मैं आपके लिए ऐसे ही पोस्ट लिखता रहूँ। 

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