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बिन्दुस्त्रावण (Guttation)

बिन्दुस्त्रावण क्या है ये किस प्राकार होता है ? इसके बारे में आज हम बात करने वाले हैं।
पेड़ पौधों की पत्तियों के किनारे पर उपस्थित छिद्र के माद्यम से पानी का बूंदों के रूप स्त्रावित होना ही बिन्दुस्त्रावण कहलाता है। और यह क्रिया जिन छिद्रों के माध्यम से होती है उस छहिदर को हाइडेथोड कहते हैं।

1. बिंदुस्त्रावण मूल दाब के कारण होता है।
2. इस क्रिया में भाग लेने वाले हायड़ेथोड पत्तियों के किनारे पर ग्रन्थियों के रूप में पाए जाते हैं।
3. ये छिद्र पत्तियों के एपिडर्मल कोशिकाओं में पाये जाते हैं तथा अत्यंत पतली भित्ति वाली कोशिकाओं के द्वारा घिरे रहते हैं।
4. प्रत्येक छिद्र के नीचे ढ़ीले रूप ( Loosely )से व्यवस्थित कोशिकाओं का एक समूह होता है, जिसे एपिथेम (Epithem) कहते हैं।
5. Epithem में बहुत से अन्तराकोशिकीय अवकाश पाये जाते हैं।
6. एपिथेम के नीचे जायलम तत्व ( Xylem elements ) पाये जाते हैं, जिन्हें ट्रेकीड (Tracheid ) कहते हैं।
7. इस प्रकार प्रत्येक हाइडेथोड़ एक अपूर्ण स्टोमेटा ( Incomplete stomata ) के समान संरचना होती है, लेकिन इसमे खुलने एवं बन्द होने की क्षमता नहीं पायी जाती है।
उदाहरण के रूप आप नास्टरशियम एवं जौ की तरुण पत्तियों को ले सकते हैं।
8. बिन्दु स्त्रावित जल में कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ अत्यधिक मात्रा में पाये जाते हैं।
9. इस जल में विभिन्न प्रकार के एन्जाइम, अमीनो अम्ल, शर्करा, कार्बनिक अम्ल, विटामिन एवं खनिज पदार्थ पाये जाते हैं।
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