छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनाट्य

छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनाट्य के बारे में तो आप जानते ही होंगे लेकिन उनके बारे मे पूर्ण परिचित होने के लिए यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

रहस -यह छत्तीसगढ़ की आनुष्ठानिक नाट्य विधा है।  यह कृष्ण की विविध लीलाओं की संगीत , नृत्य प्रधान विधा है,जो ब्रज से लगभग 300 वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ में आई थी।  यह बिलासपुर , रतनपुर , मुंगेली , जांजगीर ,  व बिल्हा में अत्यधिक लोकप्रिय है।

छत्तीसगढ़ के नाचा 

छत्तीसगढ़ का यह प्रमुख लोकनाट्य है I नाचा के अंतर्गत '  गम्मत का विशेष महत्व होता है। प्रहस्नात्मक शैली में रचित इन गम्मतो में हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रातभर आनन्द लेते हैं। इनमें स्त्री पात्रों का अभिनय पुरुष करते हैं I विवाह तथा अन्य खुशी के अवसरों पर नाचा का आयोजन किया जाता है। छत्तीसगढ़ की पहली नाचा पार्टी रेवली नाचा पार्टी  है।  जिसका गठन वर्ष 1928 में किया गया था। दाऊ दुलारसिंह ' मंदराजी ' इसके संस्थापक व लालू राम , मदनलाल निषाद, जराठनात निर्मलकर , प्रभुराम यादव , इसके श्रेष्ठ कलाकार थे।

चन्दैनी के गोंदा
  1.  लोरिक चन्दा की प्रेम गाथा को मूलरूप में ' राउत ' जाति के लोग गाते है।
  2.  इसके साथ चन्दैनी-गोंदा नाट्य के रूप में प्रचलित है।
  3.  यह एक विशिष्ट पहचान बन गई है।

ककसार

ककसार बस्तर की मुड़िया जनजाति का प्रमुख लोकनृत्य गीत है। मुड़िया लोगों में यह माना जाता है की लिंगादेव { शंकर } के पास अट्ठारह बाजे थे और उन्होंने सभी बाजे मुड़िया लोगों को दे दिए। इन्ही बाजों के साथ वर्ष में एक बार ककसार पर्व में लिंगादेव को प्रसन्न करने के लिए गाते-बजाते हैं।

भतरानाट 

भतरानाट बस्तर में ओडिसा से आया है , इसलिए कुछ लोग इसे उड़िया नाच भी कहते है। भतरानाट में प्रमुख नाट गुरु होता है व नाट की बोली भतरी होती है I नात की कथावस्तु पौराणिक पर्संग ही है। अभिमन्यु वध , जरासन्त वध , किचक वध , हिरण्यकश्यप वध, रावण वध , दुर्योधन वध , लक्षमिपुराण नाट, लंका दहन व कंस वध नाट बस्तर के भतरानाट में सर्वाधिक प्रचलित है I नाट का मंचन खुले मैदान में होता है तथा सभी अभिनय करने वाले पुरुष होते हैं।

लोकनाट्य कलाकर - छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनाट्य कलाकार हैं -- लक्ष्मण दास, ध्रुव , लक्ष्मण चन्द्राकर , हबीब तनवीर, फूलचन्द श्रीवास्तव, प्रेम चन्द्राकर आदि


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