Cg geography in Hindi

           
भूगोल हमारे विज्ञान की वह शाखा है जिसमें पृथ्वी की विभिन्न भौतिक परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है। तो चलिये बाते करते हैं छत्तीसगढ़ के भूगोल के बारे में छत्तीसगढ़ के देशान्तर रेखाओं के हिसाब से स्थिति यह 17°46' उत्तरी अक्षांश से 24°5'  उत्तरी अक्षांश तथा 80°15' पूर्वी देशान्तर से 84°20' पूर्वी देशान्तर रेखाओं के मध्य स्थित है। इसका कुल भौगोलिक क्षेत्रफल की बात करे तो यह 1,35,194 वर्ग किमी में फैला हुआ है। इसकी लंबाई उत्तर से दक्षिण की तरफ 700 किमी है तथा चौड़ाई की बात की जाये तो पूर्व से पश्चिम की ओर इसकी चौड़ाई 435 किमी है। इसकी जनसंख्या को देखा जाये तो इसकी जनसंख्या 2,55,40,196 है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार और भारत की कुल जनसंख्या का 2.11 % इसकी है। जनसंख्या की दृष्टि से इसका देश में 16 वाँ स्थान है।

छत्तीसगढ़ का भौगोलिक विस्तार

छत्तीसगढ़ के आस-पास राज्यों में उत्तर में उत्तरप्रदेश , उत्तर-पूर्वी सीमा में यह झारखण्ड से घिरा है तथा दक्षिण-पूर्व में ओडिशा राज्य स्थित है। दक्षिण में आंध्र प्रदेश , दक्षिण-पश्चिम भाग में महारष्ट्र तथा उत्तर-पश्चिम भाग में मध्य प्रदेश स्थित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ कुल 6 राज्यों से घिरा हुआ है। आप इसको भारत के नक्शे को देख कर भी जान सकते हैं। तथा इसका क्षेत्रफल के हिसाब से भारत में भारत के कुल क्षेत्रफल का 4.11% है।
* इस राज्य का क्षेत्रफल पूरे भारत के राज्यों में से 16 राज्यों से अधिक है। छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल पंजाब, हरियाणा एवं केरल इन तीनों राज्यों के योग से अधिक है। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग का क्षेत्रफल केरल के क्षेत्रफल से अधिक है। बस्तर सम्भाग का विस्तार 39,114 वर्ग किमी है।
* इसके भौगोलिक विस्तार में कई असमानताएं हैं जैसे की उत्तर-पूर्वी भाग अर्थात कोरिया , सरगुजा तथा जशपुर जिलों पर्वतमालाओं एवं पठारों का विस्तार है। मैकाल पर्वत श्रेणी कवर्धा जिले में दक्षिण-पूर्व तक फैला हुआ है।
*रायपुर जिला महानदी के ऊपरी कछार और पूर्वी सीमा पर पहाड़ी मैदान में विभक्त है
* दुर्ग एवं राजनांदगाँव छत्तीसगढ़ के मैदान और मैकाल श्रेणी में बटा है।
* बस्तर का अधिकांश भाग पठारी है। जिसकी समुद्रतल से औसत ऊंचाई 600 मी है।
* पूर्वी भाग में सक्ती पर्वत लगभग महानदी कछार तक फैला है। रायगढ़ जिला छोटानागपुर का पश्चिमी छोर है।
     इस प्रकार छत्तीसगढ़ की माटी दूर-दूर तक इन हवाओं में फैली हुई है।
आओ कुछ और महत्वपूर्ण बाते जानते हैं जो की आपके सामने इस प्रकार से प्रस्तुत है -
     मेरे अन्य पोष्ट -

छत्तीसगढ़ की मूलभूत जानकारी।
छत्तीसगढ़ के लोकनाट्य।
छत्तीसगढ़ के 2012 को नए बानाए जिलों के नाम और उनके मातृ जिले नाम  

नोट-
नदियों , पठार, वन, पर्वतमाला व मैदानी क्षेत्र के बारे में कुछ जानकारियाँ
* छत्तीसगढ़ के मैदान को छत्तीसगढ़ बेसिन या महानदी बेसिन भी कहते हैं, जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 300 मी है। इसके मैदान को ' धान का कटोरा ' नाम से भी जाना जाता है। छत्तीसगढ़ का मैदान मुख्य रूप से लाल-पीली मिट्टी का प्रदेश है। यहाँ कृषि भूमि की अधिकता है तथा आर्द्र व शुष्क पर्णपाती वनों का बाहुल्य है।
* छत्तीसगढ़ के मैदान की प्रमुख नदी महानदी है। शिवनाथ, हसदो, खारून, माण्ड, पैरी, जोक, सुरंगी व अरपा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं, जिनका प्रवाह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के मैदान से होता है।
* बघेलखण्ड का पठार प्राचीनतम भू-खण्डों में से एक है। यह खनिज संसाधनों यथा कोयला , बॉक्साइट तथा चुना पत्थर से धनी है।
* बघेलखण्ड का पठार गंगा तथा महानदी का जल विभाजक है। इसके अतिरिक्त सोन, रेणुका, कन्हार आदि नदियाँ महत्वपूर्ण हैं।
* बघेलखण्ड के पठार की प्रमुख चोटियाँ - मिलान, जैम, धनवारसा तथा कैरो है।
* कर्क रेखा बघेलखण्ड के पठार के लगभग मध्य से गुजरती हैं।
* बघेलखण्ड का पठार ऊंचे साल वनों का क्षेत्र है।
* हसदो रामपुर बेसिन में अनेक श्रृंखलाबद्ध जलप्रपात देखने को मिलते हैं।
* जशपुर का पाट क्षेत्र क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी पाट भूमी वाला क्षेत्र है।
* दण्डकारण्य पठार जिसको बस्तर का पठार के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ उष्ण आद्र पर्णपाती एवं उष्ण-शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, यहाँ जैव-विविधता पाई जाती है।
* अबूझमाड़ पर्वतमाला पर बैलाडीला की पहाड़ियाँ स्थित हैं,जिसकी मुख्यतः अवस्थिति दन्तेवाड़ा जिले में है।
छत्तीसगढ़ मुख्य ज्ञान।
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