छत्तीसगढ़ में प्राप्त प्रमुख खनिज

 छत्तीसगढ़ में प्राप्त खनिजों को धात्विक तथा अधात्विक दो वर्गों में रखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ में पाये जाने वाले खनिजों का विवरण निम्नवत है

छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले खनिज         

छत्तीसगढ़ में प्राप्त प्रमुख खनिज

कोयला

राज्य में कोयला गोण्डवाना कल्प की चट्टानों से प्राप्त होता है। भारत में कोयले के भण्डार की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का तीसरा स्थान है। छत्तीसगढ़ में देश के कुल कोयला भण्डार का 16.65% भाग है।

कोयले के भण्डारण के रूप में देश में झारखण्ड ( 29.55% ) का प्रथम स्थान एवं ओडिसा का दुसरा स्थान है। सम्पूर्ण राज्य में कोयले की पट्टियां बिखरी हुई हैं। राज्य में बिटुमिनस और लिग्नाइट कोयले की सर्वाधिक मात्रा पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कोयले का सर्वाधिक भण्डार है।

लौह-अयस्क

छत्तीसगढ़ में 26,476 मिलियन टन लौह-अयस्क के भण्डार हैं, जो देश के लगभग 18.67% है। राज्य का लौह उत्पादन की दृष्टि से देश में तीसरा स्थान है।

लौह खनन का प्रथम संयंत्र वर्ष 1968 में किरन्दुल में लगाया गया था।

लौह-अयस्क की प्राप्ति मुख्य रूप से धारवाड़ युग की आग्नेय एवं जलज शिलाओं में होती है। राज्य में उच्च श्रेणी के लौह-अयस्क के विशाल भण्डार दुर्ग तथा बस्तर जिले में उपलब्ध हैं। बस्तर के बैलाडीला निक्षेप को विश्व के सबसे बड़े निक्षेप होने का गौरव प्राप्त है।

बॉक्साइट

छत्तीसगढ़ के पठारी भागों में बॉक्साइट का विशाल भण्डार है। रायपुर, सरगुजा, बिलासपुर, कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, बस्तर तथा राजनांदगाँव जिलों में एल्युमिनियम की लम्बी पट्टियाँ हैं। सरगुजा जिले के परपटिया एवं उरंगा क्षेत्र में उच्च श्रेणी के बॉक्साइट के 19 लाख तन भण्डार हैं।

सरगुजा में मैनपाट, सात पटरी पहाड़ तथा पेरता पहाड़ पर इसके निक्षेपण मिलते हैं। जशपुर जिले के खड़िया तथा मारोल तथा जमीरपाट में बॉक्साइट के भण्डार हैं। बिलासपुर में बैलाडीला के आसपास बड़ी मात्रा में निक्षेप हैं। 

 टिन ( कैसिटेराइट )

दन्तेवाड़ा जिले के गोविंदपुर, चरवाड़ा, चित्तलवार क्षेत्र में टिन के भण्डार खोजे गये हैं। यहाँ के अयस्क में खनिज की मात्रा 66% तक है, जिसमें 2.6% लेपिनोमाइट भी मिलता है, जिसमें लिथियम खनिज होता है। इसी क्षेत्र में भीमसेन तथा वास नदियों में भी टिन मिला है।

दन्तेवाड़ा के कुटेकल्याण विकासखण्ड में 1,800 टन टिन का भण्डार प्रमाणित किया गया है। पाढ़ापुर जिले में भी टिन का पता लगा है। टिन चुकी सामरिक महत्व का खनिज है अतः ' भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ' की सहायता से रायपुर में 2 टन वार्षिक क्षमता का संयंत्र लगाया गया है।                

डोलोमाइट

यह कैल्सियम तथा मैग्नीशियम का कार्बोनेट है अर्थात चुने की जिन चटटानों में मैग्नीशियम कार्बोनेट होता है, उसे ' डोलोमाइट ' कहते हैं। इसके भण्डार जगदलपुर, दन्तेवाड़ा, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चाँपा तथा रायगढ़ जिलों में है। इसका एक बड़ा निक्षेप जगदलपुर की जगदलपुर तहसील तथा दन्तेवाड़ा की दन्तेवाड़ा तहसील में है।

मुचकोट, कुमली तिरिया, सादरतेरा, औराभांटा, कोड़पाल, तिपोड़ेरा और सिरिवादा आदि क्षेत्रों में लगभग 51 मिलियन टन का ब्लास्ट फर्नेस ग्रेड का डोलोमाइट उपलब्ध है। वर्तमान में बस्तर सम्भाग में कुल 80.4 मिलयन टन डोलोमाइट का भण्डार है। डोलोमाइट के उत्पादन में राज्य का देश में दूसरा स्थान है।

सीसा

बिलासपुर जिले में पदमपुर, दुर्ग जिले में बिलोची व थेलकादाण्ड, दन्तेवाड़ा जिले। में भांसी एवं बेंजाम,सरगुजा जिले में चिरई खुर्द एवं भैलोड़ा तथा महासमुंद जिले में रामपुर आदि में सीसा-अयस्क प्राप्त होने की सूचना है।

मैंगनीज

बिलासपुर में 516.66 मिलियन टन उच्च कोटि के मैंगनीज भण्डार हैं। मुलमुला, सेमरा, कोलिहाटोला में मैंगनीज के निक्षेप पाये जाते हैं। अनुमान है की यहॉं  17 लाख टन मैंगनीज के निक्षेप हैं।

चूना पत्थर

छत्तीसगढ़ चूने के पत्थर की दृष्टि से सम्पन्न है और यह पूरी तरह चूने के पत्थर के क्रमिक निक्षेप के ऊपर बसा हुआ है। चूने-पत्थर के उत्पादन की दृष्टि से इस राज्य का देश में पाँचवा स्थान है। यहाँ इसके विशाल भण्डार हैं। प्रदेश में पाया जाने वाला चूना-पत्थर उत्तम श्रेणी का है, जिसमें 40-50% तक चूना पाया जाता है। चुने के प्रमुख क्षेत्र-रायपुर, राजनांदगाँव, कवर्धा, बस्तर, बिलासपुर, जांजगीर तथा रायगढ़ है।

कोरण्डम

कठोरता की दृष्टि से कोरण्डम हीरे के बाद महत्वपूर्ण खनिज है। यह एल्युमिनियम का ऑक्साइड है। यह बस्तर जिले के भोपालपट्टनम तथा दन्तेवाड़ा जिले के कुचनुर में पाया जाता है। दन्तेवाड़ा के भोपालपट्टनम में 25 लाख टन कोरण्डम का भण्डार है। यह खनिज अर्ध्दबहुमूल्य रत्न की तरह आभुषनों में जड़ा जाता है तथा कठोरता के कारण इसे चिकना करने ,पॉलिश करने तथा पत्थरों को काटने के काम में लाया जाता है।

सोना

यह बहुमूल्य धातु महासमुंद, रायपुर, राजनांदगाँव, कांकेर, दुर्ग, सरगुजा तथा जशपुर आदि जिलों में सोनाखान, सोनादेही, टप्पाक्षेत्र तथा तपकरा आदि में मिलता है। एक अनुमान के तहत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 18,126 वर्ग किमी में स्वर्ण भण्डार हैं। यह प्रदेश की नदियों के बालू में मिलता है।

यहाँ के लोग नदियों के बालू को धोकर सोना निकालते हैं। जशपुर में ईब नदी, मैनी नदी, बस्तर में सबरी नदी में तथा अमोर नदी के रेत में सोना मिलता है। सोनाखान क्षेत्र स्वर्ण प्राप्ति का प्रमुख क्षेत्र है। माना जाता है की ईब-मैनी नदियों के रेत में 2,780 किग्रा स्वर्ण भण्डार है।

अभ्रक

यह मुख्यतः जगदलपुर जिले में जगदलपुर-सुकमा मार्ग पर अवस्थित दरभा घाटी में मिलता है। यह जगदलपुर जिले के गालापल्ली जारम तथा जुगाना स्थानों पर एवं मोरना नदी के पास मिलता है। यहाँ 10 से 12 सेमी के आकार के टुकड़े मिलते हैं। जगदलपुर जिले में यह बगोला, जगमारा, उनरघात, क्योन, धनपानी, बाडतली, झरनगाँव बरनीजार टोला में मिलता है।

ताँबा

यह मुख्य रूप से आग्नेय, अवसादी एवं कायांतरित शैलों से प्राप्त होता है। ताम्र खनिज सल्फाइट के रूप में पाया जाता है तथा इस धातु के कार्बोनेट, मेला


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