Tuesday, October 23, 2018

सूक्ष्मदर्शी की संरचना एवं कार्य

                      सूक्ष्मदर्शी क्या है ?

सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण है जिसका प्रयोग हम सूक्ष्म वस्तुवों को देखने के लिए करते हैं।

                      प्रकार

सूक्ष्मदर्शी को उनके गुणों के आधार पर निम्न प्रकार से बांटा गया है -
1. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी
2. इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी।
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी एक ऐसा उपकरण है जिसकी संरचना कुछ इस प्रकार होती है की इसे आसानी से पकड़ कर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से प्रकाश एवं लेंस का प्रयोग किया जाता फिर भी सूक्ष्मदर्शी निम्न भागों से मिलकर बना होता है -
1. बॉडी ट्यूब
2. नेत्रक
3. नोज पीस
4. अभीदृशयक लेंस
5. मंच ( STAGE )
6. कणड़ेन्सर
7. आइरिस डायफ्राम
8. दर्पण
9. कोर्स एडजस्टमेंट
10. फाइनल एडजस्टमेंट
11. आधार (BASE )
12. भुजा।

                सूक्ष्मदर्शी की संरचना एवं कार्य

1. बॉडी ट्यूब- 

बॉडी ट्यूब सूक्ष्मदर्शी का मेन हिस्सा होता है जो की लम्बा होता और इसके ऊपर अंतर नली तथा नेत्रक एवम् निचले भाग में दो या तीन अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं। यह नली बेलकार होता है। एवम् भुजा के द्वारा जुड़ी होती है, तथा इसके नीचे नोज पीस लगी होती है।

2. नेत्रक(eye piece )

यह बॉडी ट्यूब से लगे अंतर नली के ऊपर होता है। इसी की सहायता से बाएं आँख से किसी वस्तु के आवर्धित रूप को देखा जाता है। यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे ऊपर का भाग होता है।

3. नोज पीस -

यह बॉडी ट्यूब के नीचे का भाग है, जिसमें 2-3 अभीदृशयक लेंस लगे होते हैं जिसको आसानी से घुमाया जा सकता है। यह गोल तथा प्लेटनुमा होता है जिसकी सहायता से इसे घुमाया जाता है।

4. अभीदृश्यक लेंस -

ये नोज पीस के नीचे स्थित होता है जो 10X , 40X एवं 100 X पावर के होते हैं। इस लेंस को वस्तु के ऊपर फोकस किया जाता है।

5. मंच (stage)-

यह सूक्ष्मदर्शी का मध्य भाग है जो की भुजा से जुड़ा होता है जिसमें एक छिद्र होता है इस छिद्र में स्लाइड को फिट किया जाता है। यह दर्पण के ऊपर होता है जो प्लेट के समान चौड़ा होता है।

6. कण्डेन्सर -

कण्डेन्सर मंच के नीचे का भाग है जो प्रकाश को एकत्रित कर स्लाइड पर फोकस करता है। इसके न होने पर वस्तु का साफ दृश्य नही बनता है।

7. आइरिस डायफ्राम

डायफ्राम कण्डेन्सर के नीचे का भाग है जो की उसके नीचे फिट होता है। इसके द्वारा प्रकाश मार्ग को समायोजित किया जाता है।

8. दर्पण ( mirror )

दर्पण प्रकाश को परावर्तित करने के लिये सूक्ष्मदर्शी में लगाया जाता है जो की आधार से थोड़ा ऊपर होता है और प्रकाश को सीधे स्लाइड की ओर फोकस करता है। इसे रिफ्लेक्टर भी कहा जाता है।

9. कोर्स एडजस्टमेंट -

यह बॉडी ट्यूब को ऊपर नीचे करने के लिए लगाया जाता है , जो भुजा से जुड़ा होता है। इसका प्रयोग लेंस को वस्तु पर समायोजित करने के लिए किया जाता है।

10. फाइनल एडजस्टमेंट -

यदि लेंस को थोड़ा बहुत ऊपर नीचे करना होता है तो इसका प्रयोग किया जाता है। जो की आधार से थोड़ा ऊपर लगा होता है।

11. आधार -

यह सूक्ष्मदर्शी का सबसे नीचे का भाग होता है जो जमीन के ऊपर होता है सूक्ष्मदर्शी का बेलेंश बनाकर रखता है। यह घोड़े के नाल के आकार का होता है, जो ठोस लोहे का बना होता है।

12. भुजा ( ARM) -

इसके द्वारा सूक्ष्मदर्शी का आधार एवं बॉडी ट्यूब जुड़े होते हैं। यह मुडा हुआ होता है जिकसो पकड़ कर उठाया जा सकता है।
   इस सूक्ष्मदर्शी की सीमाये जिसकी वजह से इसका प्रयोग इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी की भाँति नही किया जा सकता है-
इसके द्वारा अधिकतम 2000-4000 गुना आवर्धन ही सम्भव है। अत्यंत छोटे वस्तु जैसे कोशिकांग का अध्ययन इसकी सहायता से नही किया जा सकता है।
इलेक्ट्रोन सूक्ष्मदर्शी के बारे मे जानने के लिए इसे क्लिक करें।

               उपयोग

इसका प्रयोग विभिन्न लैबों में तथा सूक्ष्म जीवों के अध्ययन में किया जाता है। इसकी सहायता से ही विभिन्न कार्य सफल हो पाये हैं,और विज्ञान के क्षेत्र में इसका बहुत बड़ा योगदान है। सूक्ष्मदर्शी को एक प्रायोगिक उपकरण के रूप में जीव विज्ञान , रसायन विज्ञान आदि क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है।

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