Tuesday, October 23, 2018

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी

                    परिचय: -

सूक्ष्मदर्शी का मतलब सूक्ष्म वस्तु को देखने के लिए प्रयुक्त उपकरण से है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का उपकरण का नाम है, जिसका प्रयोग ऐसे सूक्ष्म वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है जिनको सामान्य सूक्ष्मदर्शी से देखना असम्भव होता है तो आओ जाने की ये इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का इतिहास से वर्तमान का सफर -
20 वीं शताब्दी में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का विकास जीव विज्ञान एवं भौतिक विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी इलेक्ट्रोन माइक्रोस्कोप के माद्यम से किसी वस्तु का लाखो गुना आवर्धित प्रतिबिम्ब बनता है। इसके लिए इलेक्ट्रॉन बिम का उपयोग किया जाता है। इस माइक्रोस्कोप का अविष्कार नॉल एवं रस्का (1931) नामक दो जर्मन वैज्ञानिक द्वारा किया गया। इसका व्यसाय के क्षेत्र में सर्वप्रथम उपयोग सन 1940 में किया गया। 

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का सिद्धांत -

इलेक्ट्रॉन बीम में बहुत छोटी तारंगदैधर्य वाले विधुत चुम्बकीय तरंग के गुण होते हैं। इसका तरंगदैधर्य विधुत क्षेत्र उत्पन्न करने वाले वोल्टेज के वर्गमूल का व्युत्क्रमानुपाती होता है।
उदाहरण के रूप में 80 KV विधुत द्वारा उत्पन्न इलेक्ट्रॉन बीम का तरंगदैधर्य 0.05 A होता है। इलेक्ट्रोन बीम का उत्पादन इलेक्ट्रॉन गन द्वारा होता है। बीम्स को माइक्रोस्कोप के अन्य अंगों की सहायता से संकेंद्रित किया जाता है एवं इसके बाद इन्हें विधुत चुम्बकीय स्तरों के द्वारा फोकस किया जाता है।
                

                  प्रकार -

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप को दो प्रकारों में बांटा गया है -
1. ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( TEM )
2. स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ( SEM )

       TEM -

इस माइक्रोस्कोप में इलेक्ट्रॉन का मार्ग , प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश की किरणों के अनुरूप होता है। इलेक्ट्रोन गन से प्रेक्षित इलेक्ट्रॉन बीम विधुत चुम्बकीय लेंसों की श्रेणी से होकर निकलती है।

        SEM -

इस सूक्ष्मदर्शी का विकास बाद में हुआ जिसकी कार्य करने का सिद्धांत TEM से अलग है। इसमें नमूने की सतह को इलेक्ट्रॉन की पतली बीम से विकिरणीकृत किया जाता है। जिससे इलेक्ट्रॉन संकेत उत्पन्न होते हैं। इन विकिरणों के कारण नमूने से कम ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन निकलते हैं,जिन्हें धनावेशित प्लेट या एनोड पर एकत्रित किया जाता है। विधुत संकेतों का उपयोग नमूने के प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

                   क्रिया-विधी

TEM में वस्तु का आवर्धित चित्र देखने के लिए उच्च निर्वात उत्पन्न करना आवश्यक होता है, क्योकि इलेक्ट्रॉन निर्वात में ही गमन करते हैं। इसके लिए लीये गए पदार्थ को पूर्णरूपेण निर्जलीकृता करना आवश्यक होता है। कण्डेन्सर लेंस इलेक्ट्रोन बीम को नमूने पर समानान्तरित करता है और आवर्धन लेंसों द्वारा आवर्धित चित्र प्राप्त होता है। यह प्रतिबिम्ब एक ' फॉस्फोरेसेन्ट स्क्रीन ' के सम्पर्क मे आने पर दृश्य हो जाती है। एक मिलियन KV के त्वरण वोल्टेज वाला अभी-अभी विकसित किया। TEM का इलेक्ट्रॉन बीम 1 माइक्रोमीटर मोटे नमूने का भी प्रतिबिम्ब आसानी से बना सकता है। SEM में विधुत संकेतों का उपयोग नमूने का प्रतिबिम्ब उत्पन्न करने में किया जाता है। स्कैनिंग जेनरेटर के उपयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन बीम को नमूने में से चित्र रेखा की तरह गमन कराया जाता है। एनोड पर द्वितीयक इलेक्ट्रॉन के टकराने से उत्पन्न संकेतों को टेलीविजन तंत्र की तरह स्कैंन कर कैथोड पर प्रतिबिम्ब उत्पन्न किया जाता है। SEM की फोकस मापने की गहराई कई मिलीमीटर होती है। इसके द्वारा त्रिविमीय चित्र प्राप्त किया जाता है।

             उपयोगिता

1. इसकी अधिक आवर्धन क्षमता के कारण इसका प्रयोग अत्यंत छोटे कोशिकांग के अध्ययन में किया जाता है।
2. सूक्ष्म जीवो , विषाणु ,स्पोर्स आदि के अध्ययन में यह सहायक होता है।
3. इसके सहायता से नमूने की सतह का टोपोग्राफी का अध्ययन भी किया जाता है।
4. कोशिआंगो के अलावा बड़े कोशिकांगो में पाये जाने वाले वृहद जैविक अणुओं की संरचना का अध्ययन भी इसके द्वारा किया जाता है।
    

             सीमाएं

वस्तु के अत्यंत आवर्धित चित्र बनाने की क्षमता के बावजूद इसकी अपनी कुछ कमियां हैं। चूंकि वस्तु का अध्ययन करने के लिए पूर्ण निर्वात की आवश्यकता होती है अतः जीवित वस्तु का अध्ययन करने में कठिनाई होता है।  

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