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दीप्तिकालिता क्या है - diptikalita in Hindi

दोस्तों आज में आपके सामने वनस्पति विज्ञान से जुड़ी एक जानकारी शेयर कर रहा हूँ, आज हम दीप्तिकालिता के बारे में बात करने वाले हैं तो चलिए जानते हैं की पौधों में दिप्तिकालिता क्या है ?

दीप्तिकालिता क्या है

इसके नाम से स्पष्ट है की दिप्त यानी की प्रकाश और कालिता यानी उसका समय इस प्रकार इसको इस प्रकार से ब्यक्त किया जा सकता है चूंकि यह पुष्पन में मुख्य भूमिका निभाता है इस कारण यह पौधों के लिये अतिआवश्यक हो जाता है। पौधों में पुष्पन की क्रिया को सम्पादित करने के लिए आवश्यक होता है। इसकी एक समयावधि होती है जिसे दिप्तिकालिता कहते हैं।


पौधों में दीप्तिकालिता क्या है ?

इस प्रकार पुष्पन क्रिया के रूप में पौधों का दीप्तिकालिता के प्रति अनुक्रिया प्रदर्शित करना ही दीप्तिकालिता कहलाता है। इसकी खोज गार्नर एवं ऐलार्ड ( 1920 ) नामक दो वैज्ञानिको ने किया था। इन्होंने इसको तम्बाकू के पौधे में देखा था, इन्होंने देखा की तम्बाकू की मैरीलैंड मैमोथ एवं सोयाबीन की बीलॉक्सी प्रजाति अपनी अच्छी कायिक वृद्धि या शारीरिक वृद्धि के बाद भी पुष्पन नहीं कर पाती है। 

लेकिन इन्ही पौधों को शीत ऋतु में या ग्रीन हाउस में उगाने पर वो अच्छे से पुष्पित हो जाता है एवं फलों का विकास भी अच्छे से होता है। इस प्रयोग के आधार पर वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे की पौधों में पुष्पन एवं फल की वृद्धि के लिए दिन की लम्बाई ही उत्तरदायी होता है तथा तम्बाकू की इस प्रजाति का पुष्पन जिसका इन वैज्ञानिकों ने किया था इनमें पुष्पन छोटे दिन वाली अवस्थाओं में ही होता है।

इस प्रकार से पौधों की दीप्तिकालिता के आधार पर गार्नर एवं एलार्ड ने पौधों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया जो इस प्रकार है-

( 1.) छोटे दिन वाले पौधे 
( 2.) लम्बे दिन वाले पौधे 
( 3.) दिवस निरपेक्ष पौधे

छत्तीसगढ़ के नदियों के किनारे बसे राज्य अब हम बात करें इन छोटे , लम्बे एवं दिवस निरपेक्ष पौधों के बारें में तो इनके बारे जानकारी इस प्रकार है -

( 1.) छोटे दिन वाले पौधे

इसके नाम के अनुसार इन्हें कम प्रकाश यानी की कम समय के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है। इनके लिए अपेक्षाकृत छोटे दीप्तिकाल ( 8 से 10 घण्टे ) की आवश्यकता होती है एवं सतत् 14 से 16 घण्टे के अंधकार की आवश्यकता होती है। इस प्रकार इन पौधों को छोटे दिन वाले पौधे कहते हैं।

उदाहरण- तम्बाकू, सोयाबीन, कॉकलेबर, चावल, कपास, चीनोपोसियम आदि।

( 2.) लम्बे दिन वाले पौधे 

ऐसे पौधे जिनको पुष्पन के लिए अधिक लम्बे समय के प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है , उसे हम लम्बे दिन वाले पौधे कहते हैं। अथवा दीरघदीप्तिकाली पौधे कहा जाता है। इसमें लगभग 14-16 घण्टे प्रकाश की आवशयकता पड़ती है।

उदाहरण के रूप में गेंहूँ , मटर, जई, चुकन्दर,मूली, हेनबेन के पौधो को लिया जा सकता है जो की दीरघदीप्तिकाली पौधों की श्रेणी में आते हैं। लम्बे दिन वाले पौधों में कुछ विशेष लक्षण पाये जाते हैं जो की निम्न हैं:-

* लम्बे दिन वाले पौधों में प्रकाश अवस्था क्रांतिक होती है।
* लम्बे दिन वाले पौधों को रात्रि की किसी भी अवस्था में प्रकाश में अनावरित करने अथवा प्रकाश की अवधि में वृद्धि करने से पुष्पन की क्रिया उद्दीपित होती है।

( 3.) दिवस निरपेक्ष पौधे 

ऐसे पौधे जिन्हें पुष्पन के लिए किसी विशेष दीप्तिकाल की आवश्यकता नही होती है तथा वे किसी भी प्रकाश काल की उपस्थिति में पुष्प उत्पन्न करने में सक्षम होती हैं, उन्हें दिवस निरपेक्ष पौधे कहते हैं।

दिवस निरपेक्ष पौधे 5 घण्टे के प्रकाश से लेकर 24 घण्टो के सतत् प्रकाश में भी पुष्पन करते हैं।

उदाहरण:- टमाटर , सूर्यमुखी,कद्दू, कपास इनमें इस प्रकार का पुष्पन का गुण पाया जाता है की ये किसी भी समय अपना पुष्पन प्रारम्भ कर सकते हैं।

तो ये तो थी मेरे तरफ से पौधों में पाये जाने वाले दीप्तिकालिता के आधार पर पौधों के प्रकार और दीप्तिकालिता के बारे में कुछ हल्की फुल्की जानकारियाँ अन्य जानकारियों के साथ बने रहे जनवरी 2012 को बनाए नए जिलों सम्बन्धी विशेष तथ्य छत्तीसगढ़ में कौन-कौन से खनिज पाये जाते हैं। (दीप्तिकालिता क्या है ?)

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