छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वर्षा कहां होती है - Highest rainfall in Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल 135,192 वर्ग किलोमीटर हैं और इतने बड़े क्षेत्र में वर्षा कही अधिक होती हैं। तो कही कम होती हैं। यह राज्य जंगल से सम्पूर्ण हैं। और पेन पौधे जहाँ अधिक होते हैं वह वर्षा भी अधिक होती हैं।

छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वर्षा कहां होती है

छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वर्षा अबूझमाड़ मे होती है। यह बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित है। इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र तथा कुछ आंध्र प्रदेश मे पड़ता है। भारत मे विलुप्त होते बाघों के लिये यह क्षेत्र अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह भारत के 6  प्रमुख बाघ आश्रय स्थल है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है अबूझ मतलब जिसको बूझना संभव ना हो और माड़ यानि गहरी घाटियां और पहाड़। यह एक अत्यंत दुर्गम इलाका है।

अबूजमढ़ एक पहाड़ी वन क्षेत्र है, जो छत्तीसगढ़ में 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले को कवर करता है। यह गोंड, मुरिया, अबुज मारिया और हलबास सहित भारत की स्वदेशी जनजातियों का घर है। यह 2009 में छत्तीसगढ़ सरकार ने 1980 के दशक की शुरुआत में लगाए गए आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध हटा दिया हैं।

भौगोलिक रूप से अलग-थलग और काफी हद तक दुर्गम, यह क्षेत्र नागरिक प्रशासन की कोई भौतिक उपस्थिति नहीं दिखाता है, और इसे "मुक्त-क्षेत्र" के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह नक्सली-माओवादी विद्रोह का एक कथित केंद्र है।

अबूझमाड़ का अर्थ है

गोंडी भाषा में अबुजमढ़ शब्द का अर्थ है अज्ञात पहाड़ियाँ हैं। अबुज का अर्थ 'अज्ञात' और मार का अर्थ 'पहाड़ी' होता है। इस क्षेत्र में वन, लगभग 92,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ हैं। इसे दंडकारण्य भी कहा जाता है जिसका अर्थ दानव दंडक का निवास होता हैं। महाकाव्य, रामायण में इसका उल्लेख मिलता है।

अबुजमाड़ का जंगल लंबे समय से बाहरी दुनिया से अलग-थलग हैं, यह स्वदेशी मूल निवासियों का घर है। अबुजमाड़ तक केवल  नारायणपुर, बीजापुर और बसरूर के वन मार्गों से पहुँचा जा सकता है। इंद्रावती नदी इसे बस्तर क्षेत्र से अलग करती है। हाल ही में प्रवेश द्वार पर विद्रोहियों द्वारा पहुंच को खराब की गई है।

1958 में वर्तमान बस्तर संभाग के दंडकारण्य क्षेत्र में पूर्वी बंगाल के सरकारी शरणार्थी, और बाद में अपनी खनिज संपदा के लिए पहाड़ियों का शोषण करना शुरू कर दिया, जैसे कि बैलाडीला हिल्स में खुदाई की गई। 

अबूझमाड़िया जनजाति 

अबूझमाड़िया जनजाति बीजापुर जिले के नारायणपुर, दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ क्षेत्रों में निवास करती है। ओरछा को अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार कहा जा सकता है। 2002 तक इस जनजाति की कुल जनसंख्या 19401 थी। वर्तमान में इनकी जनसंख्या 22 हजार से अधिक हो गई है।

आजादी के 70 साल बाद आखिरकार इन गांवों में बिजली पहुंच गई है। एक सौर इकाई की स्थापना के माध्यम से प्रत्येक लाभार्थी को तीन 9W एलईडी बल्ब, एक पंखा और एक बहुउद्देशीय सॉकेट कनेक्शन प्रदान किया गया है। यह पहल अबूझमाड़िया के लोगों के लिए रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से बाहरी दुनिया से जुड़ने का अवसर भी खोलती है, जिसका उनके जीवन पर और सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

विद्युतीकरण की संतुष्टि के साथ-साथ, ग्रामीण संतुष्ट हैं और इस पहल को टिकाऊ बनाया गया है, क्योंकि उन्हें बिजली के बिलों का भुगतान नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा, चूंकि युवाओं को सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, इससे उन्हें अपने कौशल को विकसित करने और रोजगार पैदा करने में मदद मिल रही है।

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