छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे - freedom fighters of chhattisgarh in hindi

स्वतंत्रता संग्राम भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का उद्देश्य था। यह 1857 से 1947 तक चला। भारतीय स्वतंत्रता के लिए पहला क्रांतिकारी आंदोलन बंगाल से उभरा था। बाद में यह पुरे भारत में फ़ैल गया था।

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी निम्नलिखित थे -  वीर नारायण सिंह,  वीर गुण्डाधुर,  गेंदसिंह,  हनुमान सिंह, राघवेन्द्र राव,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह,  घनश्याम सिंह गुप्त,  डॉ. खूबचंद बघेल, पंडित माधव राव स्प्रे,  बाबू छोटेलाल, श्रीवास्तव  रविशंकर शुक्ल,  सुन्दरलाल शर्मा,  ठाकुर छेदीलाल, यति यतनलाल, पंडित देवीप्रसाद व्यास आदि। 

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे - freedom fighters of chhattisgarh in hindi

वीर नारायण सिंह

वीर नारायण सिंह सोनाखान छत्तीसगढ़ के एक जमींदार थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में भारतीय स्वतंत्रता के 1857 के युद्ध का नेतृत्व किया। उन्हें छत्तीसगढ़ के रायपुर के जयस्तंभ चौक पर फांसी दी गई थी।

उन्हें द्वितीय छत्तीसगढ़ी स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी जाना जाता है। उनके पूर्वज गोंड आदिवासी थे और भांगड़ में रहते थे। बाद में वे सोनाखान चले गए। उनके परदादा सोनाखान के दीवान थे और पैंतीस साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता राम राय से जमींदारी का अधिकार ले लिया था। वह इस क्षेत्र के सबसे युवा जमींदार बन गए।

वीर गुण्डाधुर

गुंडा धुर वर्तमान छत्तीसगढ़ में बस्तर जिले के नेथानार गांव के एक आदिवासी नेता थे। उन्होंने बस्तर में कांगेर के जंगल के धुरवाओं के 1910 के विद्रोह में एक प्रमुख भूमिका निभाई और विद्रोह का नेतृत्व किया। बस्तर के कई आदिवासियों द्वारा उन्हें नायक के रूप में माना जाता है।

हनुमान सिंह

हनुमान सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिनको छत्तीसगढ का मंगल पाण्डे कहा जाता है। 18 जनवरी 1858 को उन्होने सार्जेंट मेजर सिडवेल की हत्या कर दी थी जो रायपुर के तृतीय रेजीमेंट का फौजी अफसर थे।

रायपुर में उस समय फौजी छावनी थी जिसे 'तृतीय रेगुलर रेजीमेंट' का नाम दिया गया था। ठाकुर हनुमान सिंह इसी फौज में मैग्जीन लश्कर के पद पर नियुक्त थे। सन् 1857 में उनकी आयु 35 वर्ष की थी। विदेशी हुकूमत के प्रति घृणा और गुस्सा था। रायपुर में तृतीय रेजीमेंट का फौजी अफसर था।

गेंदसिंह 

गेंदसिंह का छत्तीसगढ़ के आजादी में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं। आजादी के समय बस्तर संभाग क्षेत्र के नेतृत्वकर्ता करते थे। गेंदसिंह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के प्रथम शहीद है | वे एक जमींदार थे तथा इन्होंने कोटरी नदी पर जलाशय का निर्माण किया था। सन 1825 में विद्रोह किया गया तथा गेंदसिंह को 20 जनवरी 1825 को कैप्टन पैबे के आदेश पर फांसी दे दी गई। 

ठाकुर प्यारेलाल सिंह

ठाकुर प्यारेलाल सिंह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन के सूत्रधार थे। उन्होने राजनीति में भी भाग लिया था। ठाकुर प्यारेलाल सिंह का जन्म 21 दिसम्बर 1891 को राजनांदगांव जिले हुआ। इनकी शिक्षा राजनांदगांव तथा रायपुर में हुई। नागपुर तथा जबलपुर में आपने उच्च शिक्षा प्राप्त कर 1916 में वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की।

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