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नेट न्यूट्रैलिटी क्या है

नेट न्यूट्रैलिटी एक प्रकार का नियम (सिद्धांत) है, जिसके तहत सभी इंटरनेट प्रदाता कंपनियों से उम्मीद की जाती है की वे सभी को एक समान इंटरनेट की सेवा प्रदान करेंगे। जैसे- की विभिन्न प्रकार की सेवाएं जो इंटरनेट द्वारा दी जाती है सभी की कीमत को एक समान करने के लिए इसकी सूक्ष्मता होती है।

इस सिद्धांत के माध्यम से ये कोशिस की जा रही है की सभी इंटरनेट प्रदाता कंपनी एक समान मानती है। और विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं में कोई भिन्न भाव नहीं होगा और कई प्रकार की सेवाओं के कई प्रकार के शुल्क न वशुल द्वारा एक ही प्रकार के शुल्क वशुलिसे।

जैसे- आप इंटरनेट पर विभिन्न प्रकार के ऐप का उपयोग करते हैं और सभी अलग तरह के शुल्क वशुलते हैं और कई तो ऐसे हैं की बिना शुल्क के आप उसका प्रयोग ही नहीं कर सकते हैं।

इस प्रकार की विभीन्न समस्याओं से सामना के लिए विभीन्न देश प्रयास कर रहे हैं जिनमें भारत भी सामिल है और भारत के टेलीकॉम रिज़्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने इसमे अपनी स्वीकृति दे दी है। 

ट्राई द्वारा सबको समान इंटरनेट देने के सुझाव के पीछे क्या उद्देश्य है?

भारतीय दूरसंचार शिक्षा प्राधिकरण यानी ट्राई ने 28 नवंबर 2017 को नेट न्यूट्रैलिटी के लिए सिफारिश की।

इसमें इंटरनेट के कई सेवाओं ने जैसे ट्रैफ़िक के लिए अलग अलग कीमत की वसूली को अनुचित ठहराया गया है। और ऐसे करने वाले सेवा और सरकार पर रोक लगाने की सिफारिस की गई है।

ट्राई का है की इंटरनेट सभी के लिए एक खुला मंच है। इसके उपयोगकर्ताओं के बीच किसी भी तरह के भेदभाव नहीं करना चाहिए।

इस तरह की एक संस्था की मांग भी की जो की सभी नियमों के उल्लंघन की निगरानी रखेगी। इसको लागू करने पर कॉन्टेंट तक पहुंच को लेकर भेदभाव पर रोक लगाना सुनिश्चित करता है।

नेट न्यूट्रैलिटी व्हेल

इंटरनेट के बुनियादी खुले ढांचे को मुक्त रखने के लिए आवश्यक हो जाता है। इससे नेटवर्क प्रोवाइडर को ये अधिकार नहीं होगा कि वह अपने डेटा संचालन को नियंत्रित करेगा।

फायदे क्या है?

ड्राइवबंड इंटरनेट सार्वजनिक सेवा की श्रेणी मे आ जाएगी। इंटरनेट सेवा सुविधाओं को यह निश्चित करना होगा की सभी वेबसाइटों, वेब सेवाओं को ग्राहकों तक एक ही गति से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।

कंपनी किसी विशेष वेबसाइट को एक्सेस करने और ज्यादा स्पीड देने में असमर्थ हो जाएगी। एक समान स्पीड से ही खुल जाएगी। पैसा और विभिन्न कारणों से भेदभाव बन्द हो जाएगा। इस प्रकार इंटरनेट मास हो जाएगा जैसे बिजली और पानी।

यूएस में विरोध किया गया है और इसका समर्थन भारत ने दिया है। इसका समर्थन भारत के लोकतन्त्र की दृढ़ता को ही अस्वीकारामित करता है। क्योकि वहाँ शुद्ध न्यूट्रलिटी को हटाकर कंपनियों को समर्थन दिया जा रहा है। जिससे लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

यदि भारत में इसको बन्द कर दिया जाता है तो निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिलेंगे

* फोन बिल अधिक होगा।

* स्पीड अलग अलग होगा विभिन्न साइट के लिए।

* टेलीकॉम से जुड़े ऐप और वेबसाइट ही फ्री रहेंगे।

* जिन वेबसाइट और ऐप के साथ करार नहीं है, उनके लिए और पैसे देने में गिरावट होगी।

* अच्छी गति के लिए अलग से पैसे देंने होंगे।

ऐसे कई देश हैं जहां नेट निरपेक्षता नहीं है

चीन में इंटरनेट पूर्णतः सरकार के नियंत्रण में है। इसको कई देशों ने इतना महत्व नहीं दिया है। और प्रतिस्पर्धा के लिए इसकी अनुपस्थिति को उचित मानते हैं। ईयू मे नियम है लेकिन उपभोक्ताओं को अधिकार है की वे सेवा का चयन अपनी सुविधा के ऑब्जर करें।

ट्राई की ओर से सुझाव उस समय आता है जब दुनिया भर में इसको लेकर बहस चल रही है। अमेरिका 2015 मे लागू नियम को वापस लेने की बात हाल ही में की थी।

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