Thursday, October 25, 2018

नेट न्यूट्रलिटी क्या है ?

                                   नेट न्यूट्रलिटी क्या है ?   

नेट न्यूट्रलिटी एक प्रकार का नियम ( सिद्धांत ) है, जिसके तहत सभी इंटरनेट प्रदाता कम्पनियों से उम्मीद की जाती है की वे सभी को एक समान इंटरनेट की सेवा प्रदान करेंगे।
जैसे- की विभिन्न प्रकार की सेवाएं जो इंटरनेट द्वारा दी जाती है सभी की कीमत को एक समान करने के लिए इसकी आवशयकता होती है।
इस सिद्धांत के माध्यम से ये कोशिस की जा रही है की सभी इंटरनेट प्रदाता कम्पनी एक समान मानेंगे। और विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं में कोई भेद भाव नहीं करेंगे और कई प्रकार की सेवाओं के कई प्रकार के शुल्क न वशुल करके एक ही प्रकार के शुल्क वशुलेंगे।
जैसे- आप इंटरनेट पर विभिन्न प्रकार के एप्प का उपयोग करते हैं और सभी अलग अलग तरह के शुल्क वशुलते हैं और कई तो ऐसे हैं की बिना शुल्क के आप उसका प्रयोग ही नहीं कर सकते हैं।
इस प्रकार की विभीन्न समस्याओं से निपटने के लिए विभीन्न देश प्रयास कर रहें हैं जिनमें भारत भी सामिल है और भारत के टेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( ट्राई ) ने इसमे अपनी स्वीकृति दे दी है।
        

ट्राई द्वारा सबको समान इंटरनेट देने के सुझाव के पीछे क्या उद्देश्य है ?

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण अर्थात ट्राई ने 28 नवम्बर 2017 को नेट न्यूट्रलिटी के लिए सिफारिश की।
* इसमें इंटरनेट के कई सेवाओं ने जैसे ट्रैफिक के लिए अलग अलग कीमत की वसूली को अनुचित ठहराया गया है। तथा ऐसे करने वाले सेवा प्रदाताओं पर सरकार से रोक लगाने की सिफारिस की गई है।
* ट्राई का है की इंटरनेट सभी के लिए एक खुला मंच है। इसके उपयोगकर्ताओं के बीच किसी भी तरह के भेदभाव नहीं करना चाहिए।
* इसने एक संस्था की मांग भी की जो की सभी नियमों के उल्लंघन की निगरानी रखेगी।
* इसको लागू करने पर कॉन्टेंट तक पहुंच को लेकर भेदभाव पर रोक लगाना सुनिश्चित करता है।
नेट न्यूट्रलिटी किसलिए?
* इंटरनेट के बुनियादी खुले ढांचे को मुक्त रखने के लिए आवश्यक हो जाता है।
* इससे नेटवर्क प्रोवाइडर को ये अधिकार नही होगा की वो अपने डाटा संचालन को नियंत्रित कर सकेंगे।

                          फायदे क्या है?

* ब्रॉडबैण्ड इंटरनेट सार्वजनिक सेवा की श्रेणी मे आ जाएंगे।
* इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को यह निश्चित करना होगा की सभी वेबसाइटों , वेब सेवाओं को ग्राहकों तक एक ही स्पीड से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाये।
* कम्पनी किसी खास वेबसाइट को एक्सेस करने तथा ज्यादा स्पीड देने में असमर्थ हो जाएंगे अर्थात एक समान स्पीड से ही खुलेंगे।
* पैसे तथा विभिन्न कारणों से भेदभाव बन्द हो जायेगा।
* इस प्रकार इंटरनेट सार्वजनिक हो जायेगी जैसे बिजली और पानी।
यूएस में विरोध किया गया है और इसका समर्थन भारत ने दिया है। इसका समर्थन भारत के लोकतन्त्र की मजबूती को ही प्रतिबिम्बित करता है। क्योकि वहां नेट न्यूट्रलिटी को हटाकर कम्पनियों को समर्थन दिया जा रहा है। जिससे लोग इसका विरोध कर रहे हैं।

अगर भारत में इसको बन्द कर दिया जाये तो निम्न प्रभाव देखने को मिलेंगे 


* फोन बिल अधिक आएगा।
* स्पीड अलग अलग मिलेगी विभिन्न साइट के लिए।
* टेलीकॉम से जुड़े एप्प और वेबसाइट ही फ्री रहेंगे।
* जिन वेबसाइट तथा एप्प के साथ करार नहीं है उनके लिए और पैसे देने पड़ेंगे।
* अच्छी स्पीड के लिए अलग से पैसे देंने होंगे।

ऐसे कई देश हैं जहां नेट निरपेक्षता नहीं है


चीन में इंटरनेट पूर्णतः सरकार के नियंत्रण में है। इसको कई देशों ने इतना महत्व नही दिया है। और प्रतिस्पर्धा के लिए इसकी अनुपस्थिति को उचित मानते है। ईयू मे नियम है लेकिन उपभोक्ताओं को अधिकार है की वे सेवा प्रदाताओं का चयन अपनी सुविधा के अनुशार करें।
ट्राई की ओर से सुझाव उस समय आएं है जब दुनिया भर में इसको लेकर बहस चल रही है। अमेरिका 2015 मे लागू नियम को वापस लेने की बात हाल ही में की थी।
DATE 03/03/2018
        

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