Monday, October 22, 2018

भारत के प्रसिद्ध स्तम्भ

            भारत के प्रसिद्ध स्तम्भ

स्तम्भ क्या है?

दोस्तों स्तम्भ एक प्रकार के मीनार जैसा ही होता है लेकिन इसमें सिर्फ लंबाई ज्यादा होती है और चौड़ाई कम होती है। ये ज्यादा क्षेत्र को घेरकर नहीं रखती हैं।
आज मैं बताने वाला हूँ अशोक स्तम्भ,लौह स्तम्भ और कीर्ति स्तम्भ के बारे में जो की अपनी विशेष बनावट तथा वैज्ञानिक तर्क से ऊपर उठा हुआ है और आज भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अशोक स्तम्भ

यह स्तम्भ बहुत ही सुंदर प्रतीत होता है ये स्तम्भ उत्तर प्रदेश में सारनाथ नामक स्थान पर स्थित है। इसका निर्माण 250 ई. पू. में हुआ था। इसका निर्माण मौर्य वंश के महान शासक अशोक ने करवाया था। शायद इसी कारण से इसे अशोक स्तम्भ के नाम से जाना जाता है। इस मीनार की विशेषता यह है की इस मीनार पर चार शेर की मूर्तियां हैं जो की एक दूसरे से पीठ से पीठ सटा कर बैठे हुए हैं। भारत ने इस स्तम्भ को राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाय है। तथा अशोक स्तम्भ में शेर के नीचे स्थित चक्र को तिरंगे के मध्य रखा है। और इसके शेरों के दृश्य को आप भारत के नोटों पर भी देख सकते हैं। यह स्तम्भ सारनाथ में स्थित संग्राहालय में रखा गया है।
            दोस्तों ये तो थी अशोक स्तम्भ यानी हमारे राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह के बारे में छोटी से जानकारी अब हम वैज्ञानिको के लिए आश्चर्य का केंद्र बनी लौह स्तम्भ के बारे मे आपको थोडा सा अवगत कराते हैं।

         लौह स्तम्भ

यह स्तम्भ दिल्ली के महरौली में कुतुबमीनार के पास स्थित है। इसका निर्माण 370 ई. के आसपास किया गया जिसे मथुरा के राजा चन्द्र द्वारा मथुरा में बनवाया गया था तथा 1050 ई. में अनंगपाल द्वारा दिल्ली में स्थापित करवाया गया। इस स्तम्भ खास बात ये की डेढ़ हजार साल से भी अधिक पुराना होने के बाद भी ये अभी भी वैसे का वैसा बना हुआ है जैसे पहले था इस स्तम्भ में अभी तक जन्ग नही लगा है लोहे का होने के बाद भी और जस के तस खड़ा है यह प्राचीन भारतीयों द्वारा विकसित धातुकर्म का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आज भी धातु वैज्ञानिकों को अचंभित करता है।
अब इस स्तम्भ की लंबाई , चौड़ाई तथा ऊंचाई की बात करें तो यह स्तम्भ लगभग 7.355 मीटर ( लगभग 23 फुट ) ऊंचा है और नीचे की गोलाई 41.6 सेमी तथा ऊपरी गोलाई 30.4 सेमी है। जमीन के अंदर 50 सेमी दबा हुआ है और यह दबा हुआ भाग कंद के समान है। इस स्तम्भ का वजन 6096 किग्रा है।
इसका रासायनिक विश्लेषण किया गया तो ज्ञात होता है की यह अत्यंत कम कार्बन युक्त इस्पात का उत्कृष्ट नमुना है जिसमें सल्फर तथा मैगनीज की मात्रा भी नहीं है किन्तु फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा (25%) में है। इस पर चढ़ी Fe3O4 की परत तथा फॉस्फोरस की मात्रा इसे संक्षारण से बचाती है।         ''स्लैग'' भी अधिक मात्रा में है जो प्रति - संक्षारक होता है।
इस लौह स्तम्भ का निर्माण पिघले हुए लोहे से एक साथ नहीं किया गया है बल्कि 30-30 किग्रा के 20 टुकड़ों को तप्त गर्म करके जोड़ा गया है। उस समय जोड़ने की क्या तकनीक रही होगी यह आज भी खोज का विषय बना हुआ है। क्योकि एक भी जोड़ कहीं पर नजर नहीं आता है। इसको देखने से प्रतीत होता है की तप्त स्लैग युक्त लौह युक्त पेस्ट के पिंडों से कुशल '' फोर्ज-वेल्डन '' प्रक्रिया अपनायी गई होगी।
तथा इसके खम्भे के नीचे का व्यास 17 इंच और शीर्ष का व्यास 12 इंच है।
                       इस बारे में मुझे जितनी जानकारी मिल सकि मैंने आपके साथ शेयर किया आपको इसके बारे में और पता हो तो comment जरूर करें।
कीर्ति स्तम्भ
इस भव्य स्तम्भ का निर्माण बघेरवाल सम्प्रदाय के श्रेष्ट जीजा एवं पूण्यासिंब ने 1301 ई. में चित्तौडगढ़ में करवाया था। यह स्तम्भ प्रथम तीर्थकर आदिनाथ को समर्पित है। कीर्ति स्तम्भ की ऊँचाई 24.5 मी है यह छह मंजिल चौकोर चबूतरे पर स्थित है, जिसमें ऊपरी मंजिल तक पहुंचने के लिए अंदर की तरफ सोपान ( सीढ़िये ) बने हुए हैं, जहां ऊपर में 12 स्तम्भों पर आधारित एक मण्डप है। निचले तल के बाह्य भाग में चारों दिशाओं मे चार तीर्थकरों की मूर्तियां उत्कीर्ण हैं।
            आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरे साथ जारी रहें अन्य जाकारीयों के साथ। 

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