राष्ट्रीय पोषण मिशन पर निबन्ध

आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग पर, आज कल बहुत सारे ऐसे टॉपिक हैं जिस पर निबन्ध का  आयोजन विभिन्न संस्थाओ द्वारा किया जाता है। आज मैंने जो टॉपिक चुना है वो राष्ट्रीय पोषण मिशन पर आधारित है। 

राष्ट्रीय पोषण मिशन परिचय 

राष्ट्रीय पोषण मिशन भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा एक कार्यक्रम है जिसमें पोषण से सम्बंधित विभीन्न समस्याओं पर कार्य किया जाता है और उसका निवारण किया जाता है। ये मिशन भारत सरकार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है।

राष्ट्रीय पोषण मिशन

कुपोषण क्या है  

कुपोषण वह स्थिति होता है , जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय के लिए नहीं मिल पाते हैं, और इसके कारण शरीर पर विभिन्न प्रकार के कमजोरियां हो जाती है इसी कारण इसे कुपोषण कहा जाता है। इस प्रकार कुपोषण के कारण महिलाओं में घेंघा रोग और बच्चों में सुखा तथा रतौंधी आदि रोग इसके ही कारण होता है। ये किसी एक कारण से नहीं होता है ये अनेक कारण से हो सकता है। ये किसी भी अमीर या गरीब देश की समस्या नहीं है बल्कि ये पूरे विश्व में फैली एक ज्वलंत समस्या है।

इसका कारण क्या है इस पर चर्चा करें तो इसके मुख्य कारण गरीबी व अज्ञानता है। संयुक्त राज्य के अनुसार भारत में हर वर्ष कुपोषण के कारण मरने वाले बच्चों में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 10 लाख से भी अधिक है। दक्षिण एशिया देशों में जनसंख्या के आधार पर देखा जाये तो भारत में कुपोषण की दर सबसे अधिक है। भारत में 5 वर्ष से कम उम्र वाले कुपोषित बच्चों की संख्या 21% है।

राष्ट्रीय पोषण मिशन की आवश्यकता 

राष्ट्रीय पोषण मिशन, इसकी  आवश्यकता इसलिए है क्योकि इस कार्यक्रम या मिशन के साथ जुड़कर आप भारत में व्याप्त विभिन्न प्रकार की कुपोषन सम्बंधित समस्याओं को दूर किया जा सके। इस पोषण मिशन को लगभग 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इसी मिशन से हमें पता चला की लगभग आधे बच्चे भारत के कुपोषित हैं।

इस समस्या के निदान के लिए भारत सरकार  के पास एक ही विकल्प था - बाल विकास एकीकृत योजना (Integreted Child devlopment Services Scheme ICDS) इस समस्या को दूर करने के लिये भारत में आंगनबाड़ी कार्यकत्रीयों को भी जोड़ा गया लेकिन इससे भी किसी प्राकर का ज्यादा बदलाव नजर नहीं आया है। इस मिशन को पूरा करने के लिए सरकार ने आदेश दिया है की कोई भी योजना बनाकर इस कार्य को पूर्ण किया जाय क्योकि बच्चों की विकलांगता के कारण और भी बहुत सारी परेशानी होते हैं। एक अनुमान के आधार पर बच्चे के जन्म के बाद 2 वर्ष के अंतर्गत भी कुपोषण हो सकता है।  

भारत में कुपोषण की स्थिति 

भारत में कुपोषण की स्थिति ज्ञात करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के अतिरिक्त कुछ अन्य संगठनों ने भी अपनी रिपोर्ट दी है, जो निम्नलिखित है

ग्लोबल हंगर रिपोर्ट

अंतराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसन्धान संस्थान ( आईएफपीआरटी  ) द्वारा हाल ही में एक ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार,119 देशों के आंकड़ों में भारत 100वें पायदान पर है तथा उत्तर कोरिया एवं बंगाल से भी पीछे हैं। पिछले वर्ष भारत 97 वें स्थान पर था।

विश्व बैंक की रिपोर्ट 

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत कुपोषण के मामले में सबसे अग्रणी हैं। यहाँ पर कम वजन वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है और जो उप सहारा अफ्रीकन की तुलना में लगभग दोगुनी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 

 यह एक प्रकार का स्वास्थ्य सर्वेक्षण है , जिसमें भारत के स्वास्थ्य स्थिति के विषय में जानकारी प्रदान की गयी है इस सर्वेक्षण के अनुसार , भारत के महिलाओं और बच्चों के समग्र पोषण स्तर में गिरावट आई है। हालांकि समान विकास दर वाली दूसरे देशों की तुलना में भारत यह अपेक्षाकृत कम है। इस सर्वेक्षण में कुपोषण के साथ साथ अन्य क्षेत्रों में भी सुधार हुए हैं। किन्तु इसकी जो गति है वह उतनी खास नही रही है। इस समस्या से निपटने के लिए इसे विकास के एजेंडे के केंद्र में लाने के लिए ही नीति आयोग ने राष्ट्रीय पोषण नीति तैयार की है।

राष्ट्रीय पोषण मिशन के लक्ष्य 

* यह मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण सम्बन्धी हस्तक्षेपों की निगरानी पर्यवेक्षक तथा उनके लक्ष्य का निर्धारण का कार्य करेगा।
* इस मिशन का लक्ष्य कुपोषण के शिकार बच्चों के रक्ताल्पता को कम करना और ठिगनापन को कम कर उनके कम वजन में भी कमी लाना है। यह लक्ष्य 2% से 3% तक रखा गया है।
* कुपोषण जैसे भीषण समस्या के कार्यक्रम बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है।
* मजबूत अभीसरण तन्त्र प्रारम्भ करना।
* मिशन को प्राप्त करने के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करना है।
* IT BASED उपकरणों के प्रयोग के लिए आँगनवाड़ी कार्यकर्त्रियों को प्रोत्साहित करना।
* आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के कद मापन की प्रक्रिया को लगातार जारी रखना।

राष्ट्रीय कुपोषण मिशन का लक्ष्य कुपोषण और जन्म के समय बच्चों का वजन कम होने की समस्याओं को हर वर्ष 2% तक कम करना है। इसके अतिरिक्त इसका मुख्य लक्ष्य -महिलाओं शिशुओं ,महिलाओं और किशोरियों में एनीमिया को 2% तक प्रतिवर्ष कम करना है। इससे निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1 दिसम्बर ,2017 को कुपोषण , जन्म के समय बच्चों का वजन कम होने आदि की समस्याओं से निपटने के लिए तीन वर्ष की अवधि तक लिए 9046 करोड़ के बजट के साथ राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत को मंजूरी दे दी है।

कुपोषण मुक्त भारत 2022 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण को समाप्त करने का लक्ष्य ' अल्प पोषण से निपटने के लिए मोड़ ' कार्यक्रम के अंतर्गत निर्धारीत किया है। जिसके लिए पूरक पोषण की गुणवत्ता में सुधार लाकर वितरण व्यवस्था को कार्यकुशल बनाया जा रहा है। इसके लिए महिलाओं हेतु 1000 कैलोरी तथा बच्चों को 600 कैलोरी तक का पोषण उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है। लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए भोजन की पोषकता आहार विविधिकरण , मिशन इंद्रधनुष तथा स्तनपान के माध्यम से स्थायी समाधान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार में निगरानी को उच्चस्तरीय बनाना आदि उपायों पर जोर दिया जायेगा।

निष्कर्ष


 किसी भी को विकसित बनाने का सपना तभी पूरा होगा जब वहां के नागरिक स्वस्थ होंगे। इसके लिए आवश्यक है की बच्चों के कुपोषण सम्बंधित समस्याओं को दूर किया जाये। इसके लिए खाद्य और पोषण आयोग की स्थापना के साथ-साथ पोषण के स्तर को बढ़ाए जाने की जरूरत पर भी ध्यान देने की जरूरत पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। फूड फोरतीफिकेशन को सुनिश्चित कर इसके लिए कानून बनाना भी अच्छा कदम है।
      
आपको ये निबन्ध कैसे लगा Comment  जरूर करें। कृपया अन्य जानकारियों के लिए बने रहें मेरे साथ धन्यवाद। 

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