Friday, October 26, 2018

ऐस्कैरिस लंब्रीकॉइड़ीज ( Asceris lumbricydes )

ऐस्कैरिस लंब्रीकॉइड़ीज

प्रकृति एवं वास ( Habit and Habitat )-
ऐस्कैरिस लंब्रीकॉइडीज मनुष्य की आंत का अंतः परजीवी है। यह विश्वव्यापी है। वितरण( Distribution )-
1. यह संसार के सभी क्षेत्रों में मिलने वाला निमेटोड है। विशेषतया यह भारत , चीन, फिलीपीन्स, कोरिया और पैसीफिक आइलैण्ड में मिलता है।
लक्षण ( Character )
1. यह प्रचलित भाषा में राउंड वर्म कहलाता है।
2. इसका शरीर लम्बा, बेलनाकार तथा तर्कुआकार होता है।
3. मादा सदैव नर से बड़ी होती है।
4. नर का पश्च सिरा सदैव मुड़ा हुआ होता है।
5. इसके शरीर की सतह पर धारियां दिखाई देती हैं जो की मोटी तथा लचीली उपचर्म की अनुप्रस्थ स्ट्रियेशन्स के कारण होती है।
6. इसके शरीर पर चार अनुदैधर्य वर्ण रेखाएं या स्ट्रीक्स या लकीरें होती हैं, जो कि पूर्ण लम्बाई में फैली रहती हैं।
7. इनको पृष्ठीय,अधर तथा पाशर्व स्ट्रीक्स कहते हैं।
8. इनके अग्र भाग में मुख स्थित होता है,जो तीन होंठों से घिरा रहता है।
9. शरीर के पश्च सिरे से लगभग 2 मि.मी. ऊपर एक चक्राकार छिद्र स्थित होता है,जिसे गुदा कहते हैं।
10. नर में क्लोयका से दो पतले पीनियल सीटी निकले रहते हैं।
11. मादा की अधर सतह पर अग्र सिरे से लगभग एक तिहाई दूरी पर छिद्र स्थित होता है, जिसे मादा छिद्र कहते हैं।

                     टीनिया सोलियम 


ये एक कृमि के समान जीव है जिसका निम्न प्रकार से वर्णन किया गया है-वर्गीकरण( classification ) 
प्रकृति एवं वास ( Habit and habitat ) 
( i ) टीनिया सोलियम एक बहुत ही प्रचलित टेप वर्म है,जो कि सुअर का मांस खाने वाले प्रदेशों में पाया जाता है।
( ii ) इसका प्रौढ़ कृमि मनुष्य की आंतों की भित्ति में एक सिर से चिपका हुआ पाया जाता है तथा बाँकी शरीर स्वतन्त्रतापूर्वक आंतों की गुहा में लटका रहता है।वितरण ( Distribution )यह भारत,चीन,चेकोस्लोवाकिया और जर्मनी में पाया जाता है। लक्षण ( Characters )-( i ) टीनिया सोलियम फिते के समान होता है,जिसके अग्र सिरे पर एक गांठ सी पायी जाती है,जिसे सिर या स्कोलैक्स कहते हैं।
( ii ) स्कोलैक्स नाशपाती के आकार का होता है जिसका अग्र सिरा एक प्रवर्ध के रूप में बाहर निकला रहता है,जिसे रॉस्टेलम कहते हैं। इसके आधार के चारों तरफ दो पंक्तियों में लगभग 28 मुड़े हुए नुकीले हुक्स पाये जाते हैं।
( iii ) रॉस्टेलम आगे की ओर निकला हुआ तथा आकुंचनशील होता है। ये चिपकने का एक अंग होता है।
( iv ) चार प्यालेनुमा चिपकाने वाले अंग स्कोलेक्स के चारों तरफ पाये जाते हैं जिन्हें चुषक कहते हैं।
( v ) सिर के पीछे एक छोटी तथा संकरी गर्दन होती है।
( vi ) बाँकी का शरीर स्ट्रोबिला कहलाता है।
( vii ) सट्रोबिला बहुत से देहखण्डों का होता है।
( viii ) इनका जीवन चक्र जटिल होता है। इसका माध्यमिक पोषक सुअर होता है।

No comments:

Post a Comment

Thanks for tip