आप सभी का फिर से ए बार स्वागत है है दोस्तों आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ छत्तीसगढ़ की एक खास पहचान के बारे में जिसे आप लोकोक्ति कहते है दोस्तों आज के इस आधुनिक युग में हर किसी के पास इतना समय नहीं है की वह छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति या गीत को पढ़े तो चलिए शुरुवात करते हैं छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति से -
छितका कुरिया मा बाग गुर्राए  -  इस छत्तीसगढ़ी लोकोक्ति का अर्थ होता है कोई भी हो वह अपने इलाके में शेर की तरह गुर्राने लगता है |
छिटका पानी बैरी तिर के बास निंदिया तिर के रुखवा एक दिन होए विनास   -    इस पंक्ति का मतलब ये होता है की जिस प्रकार सिर्फ पानी के छीटे सेे तथा नदिया ( नदी ) केे पास लगे वृृृक्ष का एक दिन विनास हो जाता है उसी प्रकार दुुुुश्मन के नजदीक निवास करने वालेे का भी एक दिन विनास हो जाता है अर्थात बर्बाद हो जाता है। 
अब आपके सामने एक छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत है -
मुनगा फूले रे सुहावन , फुले रे लाली परसा अउ फुले तोर मोंगरा  I
चन्दा संग संग तारा हो , राम लखन दोनो प्यारा हो I
चन्दा संग संग तारा हो I
मंदारी आगे गांव मां भलवा ल लेके,
डमरू बजाए खेल देखाए ,
जुरीयाए हावय गांव भर के ,,,
मंदारी आगे गांव मे भलवा ल लेके,
जुरीयाए हावे गांव भर के ।
हरि हरि गोविंद बोल रे मनवा, हरी हरी गोविंद बोल,  मुरली मनोहर किसन कनहियां अपने हृदय का पट खोल रे मनवा I