Friday, October 26, 2018

19वीं सदी में समाज एवं धर्म सुधार

क्या आप जानते हैं

 19 वीं सदी में बहुत सारे समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन हुए जिनका जिक्र आज मैं अपने ब्लॉग में करने जा रहा हूँ तो चलिए कुछ पुरानी यादें ताजा हो जाये-

भारतीय समाज तथा धर्म में सुधार की प्रक्रिया 19वीं शताब्दी में एक नए आंदोलन के रूप में उभरा जिसे भारतीय शिक्षित मध्य वर्ग ने अपना समर्थन प्रदान किया। विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के सहयोग से जनजागरण की चेतना ने अखिल भारतीय ग्रहण किया।

अंग्रेजी शासन की कुछ खामियों के कारण ये धर्म सुधार आवश्यक हो गया था।

समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन के क्या कारण हैं आओ जाने
1. पश्चिमी सभ्यता से सम्पर्क।
2. अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव।
3. मध्यम वर्ग का उदय।
4. ईसाई मिसनरीयों के कार्य।
5. समाचार पत्रों एवं आवागमन के साधनों का विकास।
6. राष्ट्रीयता की भावना का विकास।
समाज एवं धर्म सुधार आंदोलन से जुड़ी कुछ संस्थाये निम्न हैं-
1. ब्रम्ह समाज- संस्थापक राममोहन राय स्थापना वर्ष-20 AUG 1826 कलकत्ता।
2. आर्य समाज- दयानन्द सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में बम्बई में की गयी।
3. रामकृष्ण मिशन- स्वामी विवेकानन्द द्वारा 1896-97 में कलकत्ता के समीप बराह नगर में की गयी।
4. प्रार्थना समाज- आत्माराम पाण्डुरंग ने वर्ष 1867 में बम्बई में केशवचन्द्र सेन की सहायता से किया। पण्डिता रामाबाई ने इसे प्रसिद्धि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5. थियोसॉफिकल सोसायटी- मैडम ब्लावत्सकी एवं कर्नल हेनरी अल्काट द्वारा न्यूयार्क में जनवरी 1882 में की गयी। जनवरी 1882 मे भारत (मद्रास) आये और मुख्यालय स्थापित किया।
  तो दोस्तों आज के ब्लॉग में बस यही तक आगे हम जानेंगे प्रमुख समाज सुधारक के बारें में आगे इस टॉपिक में पढ़ने के लिए मेरे ब्लॉग को सब्सक्राईब करें और GMAIL के माद्यम से पढ़ें।

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