महात्मा गाँधी रोजगार गारेंटी योजना मुख्य बाते

महात्मा गाँधी रोजगार गारेंटी योजना 

महात्मा गाँधी रोजगार गारेंटी योजना इसे मनरेगा (MNREGA) भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 2005 में किया गया। इसका उद्देश्य था की गांव की प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाया जय। जिससे की बेरोजगारी में कमी होगी। ग्रामीण परिवार के काम करने वाले को 100 दिन की काम की गारंटी इस योजना के तहत दिया जाता है। प्रतिदिन 220 रूपए संविधानि न्यूनतम राशि रखी गयी है। 2010-11 में केंद सर्कार द्वारा महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी योजना के लिए 40,100 करोड़ का बजट रखा गया था।  


इस योजंना को ग्रामीण परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए शुरू किया गया था। सरकार एक कॉल सेंटर खोलने की योजना बना रही है, जिसके शुरू होने पर नि-शुल्क नंबर 1800-345-22-44 पर संपर्क कर सकते है।


छत्तीसगढ़ में रोजगार गारंटी योजना 

 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी अधिनियम 2005 की धारा 4 (1) अंतर्गत राज्य में 2 फरवरी 2006 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना छत्तीसगढ़ में प्रारंभ की गई। छत्तीसगढ़ में 02 फरवरी 2006 से प्रथम चरण में 11 जिले (बस्तर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, जशपुर, कांकेर, कबीरधाम, कोरिया,रायगढ़, राजनांदगांव एवं सरगुजा), द्वितीय चरण में दिनांक 01 अप्रैल 2007 से चार जिले (रायपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा एवं महासमुंद) तथा तृतीय चरण में दिनांक 01 अप्रैल 2008 से राज्य के समस्त जिलों में योजना प्रभावशील है। छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत 100 दिवस से बढ़ाकर 150 दिवस रोजगार प्रदाय किया जा रहा है। अतिरिक्त 50 दिवस पर होने वाला व्यय राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। मांग पत्र भरने के बाद श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर रोजगार प्रदानकरने का प्रावधान है। 


शिकायत हेतु -


शिकायतों के तत्काल निपटारे के लिये राज्य एवं जिला स्तर पर हेल्प लार्इन टोल फ्री नम्बर की व्यवस्था की गई है। योजनांतर्गत प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु राज्य द्वारा http://mgnrega.cg.gov.in/ मे आनलार्इन व्यवस्था की गई है।


रोजगार गारेंटी योजना में राजनीती 

हमारे देश सत्ता ही सब कुछ होता है लिए लोग कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाते है। इस योजना में भी राजनीती चला कुछ राजनेता कहना है की वाम-दाल के समर्थन से सरकार ने इस योजना को लाया। इसी योजना के वादे के कारण 2009 में यूपीए की सरकार बन सकी। बेल्जियम में जन्मे और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स में कार्यरत् अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की इस परियोजना के पीछे एक अहम भूमिका है। 


केंद सरकार भूमिका 

केंद सरकार इस योजना के माल की लागत (कार्य पर खर्च )का 3/4 और प्रशानिक लागत का कुछ प्रतिशत वाहन करती है। राज्य सरकार बेरेजगारी भत्ता और माल की लागत का 1/4 प्रतिशत वाहन करती है। चूंकि राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ता देती हैं, उन्हें श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भारी प्रोत्साहन दिया जाता है।

काम लेने की प्रक्रिया 

ग्रामीण परिवारों के युवा सदस्य,(18 वर्ष से अधिक) ग्राम पंचायत के पास एक तस्वीर के साथ अपना नाम, उम्र और पता जमा करते हैं। जांच के बाद पंचायत, घरों को पंजीकृत करता है और एक जॉब कार्ड प्रदान करता है। जॉब कार्ड में, पंजीकृत वयस्क सदस्य का ब्यौरा और उसकी फोटो शामिल होती है। एक पंजीकृत व्यक्ति,  पंचायत को लिखित रूप से काम करने के लिए आवेदन लिख करकाम मांग सकता है। 


महात्मा गाँधी रोजगार गारेंटी योजना



महात्मा गाँधी रोजगार गारेंटी योजना की खास बातें  


  • 1. इस योजना के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अकुशल शारीरिक कार्य की मांग किये जाने पर काम मुहैया कराया जाता है , इसमें लोगों को वित्तीय वर्ष में 100 दिन का रोजगार परिवार के सभी लोगों को मिलाकर दिया जाता है।
  • 2. इस रोजगार को प्राप्त करने के लिए पंचायत के माध्यम से पंजीयन कराया जाता है।
  • 3. कम से कम 10 ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों द्वारा रोजगार की मांग किये जाने पर 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
  • 4. इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवार को 5 किमी के अंदर में काम उपलब्ध कराया जाता है और यदि काम उपलब्ध ना हो तो उसे 10 किमी के अंतर्गत काम दिया जाता है और इसके अतिरिक्त उस परिवार के सदस्यों को 10 प्रतिशत अधिक भुक्तान भी किया जाता है।
  • 5. मांग किये जाने के बाद यदि 15 दिन के भीतर कोई कार्य उपलब्ध ना होने पर उस परिवार के सदस्यों को बेरोजगारी भत्ते की मांग का पूर्ण अधिकार होता है। लेकिन यदि 15 दिनों के भीतर यदि काम उपलब्ध हो जाता है और वह कार्य में नहीं जाता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता नही दिया जाता है।
  • 6. बेरोजगारी भत्ते का भुक्तान का ये नियम है कि प्रथम 30 दिन में न्यूनतम मजदूरी का सिर्फ 1/4 भाग ही दिया जाता है और फिर बाद में न्यूनतम मजदूरी का आधा दिया जाता है।
  • 7. इस कार्य के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य दिया जाता है।
  • 8. इस योजना के तहत यदि रोजगार के दौरान मृत्यु हो जाता है तो मज़दूर को 25000 रुपये का अंतरिम राहत का भुगतान किया जाता है।
  • 9. इस योजना के तहत एक ही कार्य में न्यूनतम 14 दिन का कार्य दिया जाता है और मजदूरी का नगद भुक्तान साप्ताहिक किया जाता है।
  • 10. योजना के अंतर्गत कुल आबंटन का कम से कम 50 प्रतिशत राशि का कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जाना होता है।
  • 11 . इसके लिए आप आवेदन ग्राम पंचायत और नगर पंचायत में कर सकते हैं। 


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